मीटिंग में क्या हुआ?
राहुल गांधी की जनसभाएं 22 जनवरी से दिल्ली में फिर शुरू होने जा रही हैं। सीलमपुर में पहली जनसभा के बाद कांग्रेस के प्रचार में ठहराव आ गया था। बैठक में इस बात पर सवाल उठे कि दूसरे राज्यों से आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिल्ली में प्रचार के लिए अब तक क्यों नहीं जुटे हैं। इसके साथ ही, यह भी चर्चा हुई कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ कांग्रेस का प्रभावी नैरेटिव अब तक क्यों नहीं बन पाया है। बैठक में पार्टी के स्थानीय नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे आक्रामक रूप से चुनाव प्रचार करें और कांग्रेस की पांच गारंटियों को जनता तक पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करें। खासतौर पर महिलाओं और युवाओं से जुड़े वादों पर फोकस करने को कहा गया।
कौन-कौन नेता रहे शामिल?
इस महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली के प्रभारी काजी निजामुद्दीन, प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव, और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। नेताओं से कहा गया कि कांग्रेस के वादों को सीधे जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं। पार्टी नेतृत्व ने लोकल नेताओं से महिलाओं और युवाओं के लिए की गई घोषणाओं को प्रभावी ढंग से प्रचारित करने के लिए नए रास्ते तलाशने को कहा।
राहुल गांधी की रैलियों पर नजर
राहुल गांधी इस सप्ताह दिल्ली में ताबड़तोड़ रैलियां करेंगे। उनका लक्ष्य पारंपरिक कांग्रेस वोटरों को वापस पार्टी से जोड़ना है। 22 जनवरी: राहुल गांधी की पहली जनसभा सदर बाजार में होगी, जहां मुस्लिम, दलित, और ब्राह्मण वोटरों का कॉम्बिनेशन है।
23 जनवरी: मुस्तफाबाद में मुस्लिम बाहुल्य इलाके में जनसभा करेंगे।
24 जनवरी: अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मादीपुर विधानसभा क्षेत्र में रैली होगी, जहां सिख आबादी भी काफी है। बैठक में तय किया गया कि पार्टी के प्रचार अभियान का मुख्य जोर कांग्रेस की गारंटियों को जनता तक पहुंचाने पर होगा। इनमें महिलाओं और युवाओं के लिए की गई घोषणाओं को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा।
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