वोट ट्रांसफर में हुई देरी, जानबूझकर रोकने का आरोप
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि अवध ओझा ने 7 जनवरी को फॉर्म 8 भरकर दिल्ली में अपने वोट को ट्रांसफर करने की कोशिश की थी, लेकिन 24 घंटे के भीतर दिल्ली चुनाव आयोग ने अपना आदेश बदल दिया। पहले फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 7 जनवरी थी, लेकिन अचानक इसे 6 जनवरी कर दिया गया। केजरीवाल ने इसे जानबूझकर रोकने की साजिश करार देते हुए सवाल उठाया कि यह कदम केवल एक उम्मीदवार को पटपड़गंज से चुनाव लड़ने से रोकने के लिए उठाया गया।
क्या है पूरा मामला?
केजरीवाल ने विस्तार से बताया कि अवध ओझा का वोट पहले ग्रेटर नोएडा में था और दिल्ली में वोट ट्रांसफर करने के लिए उन्होंने 26 दिसंबर को फॉर्म 6 भरा था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। बाद में पता चला कि वोट ट्रांसफर के लिए फॉर्म 8 भरना आवश्यक था, जिस पर 7 जनवरी को उन्होंने यह फॉर्म जमा किया। चुनाव आयोग के मैनुअल के अनुसार, फॉर्म 6, 7 और 8 को नामांकन की आखिरी तारीख से 10 दिन पहले तक भरा जा सकता था, और 7 जनवरी तक यह प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने 24 घंटे में अपना आदेश बदलते हुए कहा कि आखिरी तारीख 6 जनवरी थी, जिससे ओझा का वोट ट्रांसफर होना मुश्किल हो गया। केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग का मैनुअल यह भी कहता है कि अगर फॉर्म लास्ट डेट के बाद आता है, तो खास मामलों में उसे स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन यहां तो एक उम्मीदवार के चुनावी भविष्य का सवाल है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह इस मामले को लेकर आज दोपहर 3 बजे चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अवध ओझा का वोट ट्रांसफर कर दिया जाए ताकि वह पटपड़गंज से चुनावी नामांकन कर सकें और चुनाव लड़ने का उनका अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।





