संदीप दीक्षित ने इस घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "यह बात 2009 के लोकसभा चुनाव की है, जब दिल्ली में कांग्रेस की लहर थी और मुझे चुनावी मैदान में मजबूत स्थिति में देखा जा रहा था। उस समय मुझे निखिल डे जी का फोन आया, जिन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मैं चुनाव प्रचार के लिए उनकी मदद लूंगा। उनका कहना था कि कांग्रेस की लहर का फायदा उठाते हुए वे मेरी मदद करना चाहते हैं। मैं तुरंत तैयार हो गया क्योंकि मुझे लगा कि इससे चुनाव में फायदा होगा।"
दीक्षित ने आगे कहा, "निखिल ने मुझसे कहा कि वे और अरविंद केजरीवाल मिलकर प्रचार करेंगे और उन्होंने कहा कि प्रचार करने के लिए किसी प्रकार का खर्चा नहीं आएगा।
यह सुनकर मुझे खुशी हुई, क्योंकि मुझे लगा कि अगर कोई खर्च नहीं होगा तो यह चुनावी प्रचार का सबसे अच्छा तरीका होगा। इसके बाद केजरीवाल ने मुझे एक बिल दिया, जिसमें एक वार्ड के प्रचार पर 40 लाख रुपए का खर्चा आने का अनुमान था। मुझे इस बिल को देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। उस समय दिल्ली में इतना खर्चा कभी नहीं होता था।"
इसके बाद संदीप दीक्षित ने स्पष्ट किया, "मैंने केजरीवाल से कहा कि मेरे पास 40 वार्ड हैं, आप उनमें से कोई एक वार्ड ले लीजिए। मुझे डर था कि अगर आप प्रचार में पूरी तरह से नियंत्रण में आ गए तो मेरे कार्यकर्ता मेरी ओर से काम नहीं करेंगे। चुनाव आखिरकार कार्यकर्ताओं के सहारे लड़ा जाता है, और मैं नहीं चाहता था कि प्रचार में मेरी स्थिति कमजोर हो।"
संदीप दीक्षित ने केजरीवाल के बारे में और बात करते हुए उन्हें "एम्मोरल" (नीतिहीन) करार दिया। उन्होंने कहा, "देखिए, लोग दो तरह के होते हैं। कुछ लोग इम्मोरल (अनैतिक) होते हैं, जो समय-समय पर हम सभी हो सकते हैं। लेकिन कुछ लोग एम्मोरल होते हैं, जो कभी भी नैतिकता (मोरालिटी) का पालन नहीं करते और केवल अपने हितों को ही सामने रखते हैं।
अरविंद केजरीवाल उसी श्रेणी में आते हैं। वे सच और झूठ, सही और गलत का अंतर नहीं समझ पाते और खुद को हमेशा सही साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।"
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 5 फरवरी को होगा और मतगणना 8 फरवरी को होगी। इस बार की चुनावी जंग में कांग्रेस पार्टी की ओर से संदीप दीक्षित को नई दिल्ली सीट पर चुनावी मैदान में उतारा गया है, जबकि आम आदमी पार्टी की तरफ से अरविंद केजरीवाल और भाजपा की तरफ से प्रवेश वर्मा उम्मीदवार हैं। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा और इसे लेकर दिल्ली की राजनीतिक हलचल भी तेज है।
दिल्ली में आगामी चुनाव में न सिर्फ सत्ता के समीकरण बदलने की संभावना है, बल्कि इस चुनाव के परिणाम देश की राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली की राजनीति में उनकी स्थिति काफी कमजोर रही है और संदीप दीक्षित की उम्मीदवारी को पार्टी अपनी खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करने के रूप में देख रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही सत्ता में आने के लिए इस चुनाव में जोर-शोर से प्रयास कर रही हैं।
यह चुनाव दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जहां एक ओर कांग्रेस अपनी पुरानी स्थिति को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर आप और भाजपा के बीच का संघर्ष और अधिक तीव्र हो गया है।
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