बिधूड़ी ने यह भी बताया कि किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण करने के बाद दिल्ली सरकार ने उन्हें वैकल्पिक आवासीय भूखंड देने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने इस योजना को भी बंद कर दिया। इसके अलावा, किसानों के वारिसों के नाम दाखिल-खारिज पर भी रोक लगा दी गई, जो हाल ही में भाजपा सांसदों के अनुरोध के बाद उपराज्यपाल ने शुरू किया।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली के किसानों को उनकी फसलों पर 50 फीसदी अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा भी कभी पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा, किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का वादा भी उन्होंने नहीं निभाया और अब किसानों से बिजली की व्यावसायिक दरें वसूली जा रही हैं।
बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने 20 सूत्री कार्यक्रम के तहत भूमिहीन किसानों को जो जमीन दी थी, उन्हें मालिकाना हक देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा भी दिल्ली सरकार ने पूरा नहीं किया। ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी सरकार ने कमर्शियल घोषित कर दिया, जिससे किसानों को कोई राहत नहीं मिली।
इसके अलावा, बिधूड़ी ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार ने धारा 81-ए और 33-ए को समाप्त करने का फैसला भी लिया था, लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इन धाराओं के लागू होने के कारण जीडीए नीति और लैंड पूलिंग नीति लागू नहीं हो सकी, जो किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी।
भा.ज.पा. नेता ने आरोप लगाया कि केजरीवाल और उनकी सरकार ने न केवल दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के साथ भेदभाव किया है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किसानों के लिए घोषित कई जनकल्याणकारी योजनाओं को भी लागू नहीं होने दिया है। इस वजह से दिल्ली के किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ और उनका विकास रुक गया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों की जनता अब केजरीवाल की सच्चाई को समझ चुकी है और आगामी चुनावों में वे इसका माकूल जवाब देंगे। अब यह देखना होगा कि दिल्ली के लोग आगामी चुनावों में केजरीवाल को उनके झूठे वादों और उनके विश्वासघात का सबक सिखाते हैं।
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