इन उम्मीदवारों को चुनने में पार्टी ने विभिन्न समुदायों और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखा है। चंद्रशेखर आजाद, जो दिल्ली के राजनीतिक दंगल में एक युवा दलित नेता के रूप में उभरे हैं, अब अपनी पार्टी के विस्तार की दिशा में काम कर रहे हैं।
पार्टी के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि चंद्रशेखर आजाद और उनकी पार्टी इस चुनाव में अपनी पहचान और राजनीतिक ताकत को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले, हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी आजाद समाज पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे और जेजेपी के साथ गठबंधन किया था। चंद्रशेखर आजाद ने 2020 में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की स्थापना की थी, और तब से ही वह दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा और उनका उत्थान करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। मतदान 5 फरवरी को होगा और मतगणना 8 फरवरी को की जाएगी।
दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं, और पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी ने 8 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। कांग्रेस इस चुनाव में अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने में नाकाम रही और उसका खाता भी नहीं खुला। इस बार, आजाद समाज पार्टी का लक्ष्य दिल्ली में एक प्रभावशाली और स्थिर राजनीतिक पहचान बनाना है, और इसके लिए चंद्रशेखर आजाद और उनकी पार्टी पूरी तरह से तैयार हैं।
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