यह आंकड़ा एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और दिल्ली इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट से सामने आया है, जिसमें दिल्ली विधानसभा में विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों, पेश और पास किए गए विधेयकों के साथ-साथ विधानसभा के अन्य कार्यों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा 522 सवाल वर्ष 2022 में पूछे गए, जबकि 2020 और 2024 में सवाल पूछने की रुचि सबसे कम रही। 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण यह स्थिति बन सकती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2024 में भी कोई विधायक दिल्ली के मुद्दों पर सवाल नहीं पूछ पाए।
इस रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न विभागों से जुड़े सवालों की संख्या में कुछ विभागों ने प्रमुख स्थान पाया। सबसे ज्यादा सवाल अरबन डेवलपमेंट विभाग से 130 पूछे गए। इसके बाद पीडब्ल्यूडी (98 सवाल), दिल्ली जल बोर्ड (76 सवाल), स्वास्थ्य (74 सवाल), शिक्षा (55 सवाल), और राजस्व (52 सवाल) विभागों से जुड़े सवालों की संख्या रही। इसके अलावा खाद्य एवं आपूर्ति (50 सवाल), परिवहन (47 सवाल), अरबन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (43 सवाल), और सोशल वेलफेयर (37 सवाल) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि दिल्ली के विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर विधानसभा में सवाल पूछे गए, लेकिन उनका समाधान होता हुआ नहीं दिखाई दिया।
वहीं, विधानसभा के इस कार्यकाल में विधायकों के प्रदर्शन के साथ-साथ अन्य घटनाओं ने भी ध्यान आकर्षित किया। खासकर, दिल्ली के गोविंदपुरी में आम आदमी पार्टी की मुख्यमंत्री और प्रत्याशी आतिशी ने भाजपा के प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी के समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आतिशी का कहना है कि सोमवार को उनके कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा समर्थकों ने मारपीट की और उन्हें धमकी दी। इस घटना के बाद आतिशी ने चुनाव आयोग से गोविंदपुरी क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की मांग की है, ताकि चुनाव में निष्पक्षता और शांति बनी रहे।
आतिशी के समर्थकों का आरोप है कि भाजपा के समर्थक जानबूझकर चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी दिल्ली में भाजपा के नेताओं के खिलाफ असहमति जताते हुए कई बार विरोध प्रदर्शन किए हैं।
दिल्ली विधानसभा के इस कार्यकाल के दौरान यह देखा गया कि भाजपा के विधायक जहां सवाल पूछने के मामले में आगे थे, वहीं आम आदमी पार्टी के विधायक, जो विधानसभा में अपनी उपस्थिति के लिए जाने जाते हैं, सवालों के मामले में पीछे रह गए। यह स्थिति उन मुद्दों को लेकर असंतोष और निराशा को दर्शाती है, जिन पर आम आदमी पार्टी को अधिक ध्यान देना चाहिए था।
अब देखना यह होगा कि विधानसभा के अगले सत्रों में विधानसभा के कार्यों को लेकर क्या सुधार आता है और क्या इन सवालों और मुद्दों का स्थायी समाधान हो पाता है।
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