Molitics Logo
होम चुनाव Bihar Polls: तेजस्वी-ओवैसी की जुगलबंदी के संकेत? AIMIM बोली- मजबूती से लड़ेंगे चुनाव
चुनाव

Bihar Polls: तेजस्वी-ओवैसी की जुगलबंदी के संकेत? AIMIM बोली- मजबूती से लड़ेंगे चुनाव

ओवैसी ने कहा, “हम भी भारतीय जनता पार्टी को हराना चाहते हैं, लेकिन किसी की शर्तों पर नहीं। हमारा संघर्ष गरीबों, वंचितों और हाशिये पर पड़े लोगों की राजनीतिक आवाज़ को बुलंद करने का है।

Bihar Polls: तेजस्वी-ओवैसी की जुगलबंदी के संकेत? AIMIM बोली- मजबूती से लड़ेंगे चुनाव
फोटो: Bihar Polls: तेजस्वी-ओवैसी की जुगलबंदी के संकेत? AIMIM बोली- मजबूती से लड़ेंगे चुनाव
AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव(Bihar Polls) को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ संभावित गठबंधन की अटकलों पर स्पष्ट शब्दों में अपना रुख जाहिर किया है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि अब एकतरफा मोहब्बत नहीं होने वाली है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की जनता अब सच को समझ चुकी है और जो भी आरोप उन पर या उनकी पार्टी पर लगाए गए थे, वे पूरी तरह निराधार और झूठे थे।

ओवैसी ने कहा, “हम भी भारतीय जनता पार्टी को हराना चाहते हैं, लेकिन किसी की शर्तों पर नहीं। हमारा संघर्ष गरीबों, वंचितों और हाशिये पर पड़े लोगों की राजनीतिक आवाज़ को बुलंद करने का है। INDIA गठबंधन के कुछ दल नहीं चाहते कि ये समुदाय अपने नेतृत्व को स्वयं चुने, वे चाहते हैं कि बिहार के लोग उनके राजनीतिक एजेंडे के गुलाम बने रहें। AIMIM इस मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगा।” AIMIM प्रमुख ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी बिहार में एक नए विकल्प यानी तीसरे मोर्चे के गठन की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। ओवैसी ने कहा, “हम बिहार में अपना चुनाव पूरे दमखम के साथ लड़ेंगे और सीमांचल की जनता के हक के लिए संघर्ष जारी रहेगा।”

चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल

ओवैसी ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Special Summary Revision) को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “भारतीय निर्वाचन आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार किसने दिया? यह अधिकार तो संविधान के अनुसार गृह मंत्रालय के पास है। आयोग किस आधार पर सीमांचल के मतदाताओं को नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस भेज रहा है? यह ‘बैकडोर एनआरसी’ का ही एक रूप है, जिसे हम हर हाल में नकारेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “यह बहुत खेदजनक है कि एक संवैधानिक संस्था जनता से संवाद सूत्रों के माध्यम से कर रही है। चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने मतदाताओं की नागरिकता जांचने का अधिकार कहां से प्राप्त किया है। यह गरीबों, मुसलमानों और हाशिए पर खड़े समुदायों को डराने और हाशिए पर धकेलने की साजिश है।”