बांसुरी स्वराज ने कहा कि जो 'आप' सरकार 17 महीनों से इमामों और मौलवियों को वेतन नहीं दे सकी, वही अब चुनावी लाभ लेने के लिए पुजारियों और ग्रंथियों को धोखा देने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि केजरीवाल ने तुष्टिकरण की राजनीति की शुरुआत की है, और अब चुनाव नजदीक आते ही वोटबैंक के लिए धार्मिक नेताओं को वेतन देने का वादा किया है। बांसुरी ने यह भी कहा कि केजरीवाल सरकार ने पिछले एक दशक में न तो पुजारियों का सम्मान किया, न ही धर्मस्थलों या ग्रंथियों का, और अब जब चुनाव आ गए हैं, तो वे इन्हें अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए याद कर रहे हैं।
इसके साथ ही बांसुरी स्वराज ने केजरीवाल के उस बयान का भी विरोध किया, जिसमें उन्होंने मौलवियों को वेतन देने की जगह 'ऑनरेरियम' (सम्मान राशि) का हवाला दिया था।
बांसुरी ने सवाल किया कि यदि केजरीवाल की सरकार है, तो वे तुरंत पुजारियों और ग्रंथियों को सम्मान राशि क्यों नहीं दे रहे हैं, और क्यों चुनाव तक का इंतजार कर रहे हैं। बांसुरी ने यह भी कहा कि वे दिल्ली की जनता को बताना चाहती हैं कि एक दशक तक केजरीवाल ने धर्मस्थलों और धार्मिक नेताओं के लिए कोई कदम नहीं उठाया, लेकिन अब वोटों की राजनीति के लिए वे इन वादों को लेकर आ गए हैं।
इसके अलावा, बांसुरी ने केजरीवाल की महिला सम्मान योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से पंजाब में इस योजना से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया, जहां महिलाएं अब तक एक-एक पैसे के लिए तरस रही हैं। उनका कहना था कि केजरीवाल ने पंजाब में जो वादा किया था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ है।
वहीं दिल्ली में, वह महिलाओं से रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनका व्यक्तिगत डेटा एकत्र कर रहे हैं, जबकि योजनाएं अब तक लागू नहीं की गई हैं। बांसुरी ने कहा कि केजरीवाल केवल चुनावी लाभ के लिए इन योजनाओं की घोषणा करते हैं, लेकिन वास्तव में इनका कोई ठोस परिणाम जनता के सामने नहीं आता।
बांसुरी स्वराज ने अंत में यह भी चुनौती दी कि केजरीवाल अपने बयानों और योजनाओं को अब तुरंत लागू करें और दिखाएं कि उनकी सरकार वास्तव में अपने वादों को पूरा करने के लिए तैयार है, न कि सिर्फ चुनावी समय में उन्हें हवा में उड़ाने के लिए।
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