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भविष्य में कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, नहीं समझ पाये किसान आंदोलन को - दुष्यंत चौटाला

लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन पर दुष्यंत ने कहा, “मेरी गलती रही, मैं किसानों के आंदोलन को समझ नहीं पाया। हमारा मेजर वोट शेयर किसान थे। उस मेजर वोट शेयर की आंदोलन के दौरान डिमांड थी कि मुझे हरियाणा सरकार से हट जाना चाहिए।

भविष्य में कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, नहीं समझ पाये किसान आंदोलन को - दुष्यंत चौटाला
फोटो: भविष्य में कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, नहीं समझ पाये किसान आंदोलन को - दुष्यंत चौटाला
हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने बड़ा बात कही है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। यह बात उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कही। वहीं, इंडिया गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास संख्या हुई और अगर हमारी पार्टी को प्राथमिकता से लिया जाता है तो जरूर साथ जाएंगे। दुष्यंत ने कहा कि उनकी पार्टी आने वाले दिनों में हरियाणा की सबसे महत्वपूर्ण पार्टी होगी।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दुष्यंत चौटाला के बयान "दोबारा बीजेपी के साथ नहीं जाऊंगा" पर पलटवार करते हुए कहा, “उन्हें किसने आमंत्रित किया?" मनोहर लाल खट्टर ने आगामी हरियाणा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी।


किसानों के आंदोलन को नहीं समझ पाये


लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन पर दुष्यंत ने कहा, “मेरी गलती रही, मैं किसानों के आंदोलन को समझ नहीं पाया। हमारा मेजर वोट शेयर किसान थे। उस मेजर वोट शेयर की आंदोलन के दौरान डिमांड थी कि मुझे हरियाणा सरकार से हट जाना चाहिए। मैंने और मेरी पार्टी ने सोचा कि हमें सरकार के साथ खड़े रहना चाहिए, क्योंकि बिल केंद्र सरकार के थे। लेकिन उन सेंटिमेंट्स को हम शायद नहीं समझ पाये। उसका भुगतान हमें लोकसभा में करना पड़ा।” 

हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर दुष्यंत ने कहा कि हमें कॉन्फिडेंस है, जो होना था लोकसभा चुनाव में हो गया। जो गुस्सा था वो निकल गया। पिछली बार भी हम किंग मेकर थे, हमारी चाबी(जेजेपी का चुनाव चिन्ह) ने विधानसभा का ताला खोला था। आने वाले दिनों में देखेंगे कि जेजेपी राज्य की सबसे महत्वपूर्ण पार्टी होगी। 

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने 'जाट पॉलिटिक्स' पर कहा कि आप एक जाति की राजनीति नहीं कर सकते। आपको सोशल इंजीनियरिंग करनी होगी। उन्होंने कहा कि चौधरी देवीलाल 90 में से 85 सीट लेकर आए थे। उन्होंने 'अजगर' का नारा दिया था, जिसका मतलब अहीर, जाट, गुर्जर और राजपूत है।


हरियाणा में एक नया गठबंधन 

इसके आलावा हरियाणा में जेजेपी और चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आसपा (कांशीराम) ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। मीडिया में चर्चा यह भी चल रही है की जेजेपी गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी से भी संपर्क कर रही है। दरअसल, जेजेपी आसपा (कांशीराम) से इसलिए गठबंधन किया है क्योंकि हरियाणा में करीब 20 फीसदी दलित रहते हैं। जो हार और जीत में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। विधानसभा की 17 सीटें रिजर्व हैं और राज्य की 35 सीटों पर दलित वोटरों का प्रभाव है। जेजीपी का टारगेट इन्हीं 17 और 35 सीटों पर है, जिससे वह 2019 की तरह हरियाणा में किंगमेकर की भूमिका में आ सके।