हुड्डा पर हार का ठीकरा फोड़ने की कोशिश की गई, खासकर कुमारी सैलजा के गुट ने उन्हें हार के लिए जिम्मेदार ठहराया।
इस आलोचना से हुड्डा आहत दिखे और उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा, "जीत के सौ बाप होते हैं, लेकिन हार का कोई नहीं।" उनकी यह टिप्पणी चुनाव नतीजों के बाद से जारी आरोप-प्रत्यारोप की ओर इशारा कर रही थी।
हुड्डा की इस टिप्पणी पर राहुल गांधी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। एक रिपोर्ट के अनुसार, राहुल ने उसी अंदाज में जवाब देते हुए कहा, "जो कुछ भी हो रहा है, उसका मैं ही बाप और दादा हूं। हर चीज का जिम्मेदार मैं ही हूं।" राहुल गांधी का यह बयान महत्वपूर्ण था क्योंकि उन्होंने हार की जिम्मेदारी लेने का स्पष्ट संदेश दिया।
गौरतलब है कि राहुल गांधी पहले भी पार्टी नेताओं को सीधे और कड़े शब्दों में फटकार लगा चुके हैं। गुजरात में उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं को भाजपा का "स्लीपर सेल" कहा था, वहीं मध्य प्रदेश में उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं को "बारात का घोड़ा" बताते हुए उनकी उपयोगिता पर सवाल उठाए थे।
हरियाणा की बैठक में हालांकि उनका रवैया संयमित रहा, लेकिन हुड्डा के तंज का जवाब देकर उन्होंने नेतृत्व की जिम्मेदारी को लेकर अपनी बात स्पष्ट कर दी।
बैठक में एक और दिलचस्प पहलू यह था कि सैलजा और हुड्डा, जो आमतौर पर एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं, इस बार एक मुद्दे पर सहमत नजर आए। सैलजा ने राहुल गांधी से कहा कि चुनाव परिणामों को सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन को मजबूत करने के लिए कोई बैठक नहीं बुलाई। उनकी इस बात पर हुड्डा भी सहमति जताते हुए सिर हिलाते दिखे।





