पहले से रची गई थी हिंसा की साजिश
पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि नागपुर में भड़की हिंसा सुनियोजित साजिश थी। फहीम खान ने कुछ कट्टरपंथी तत्वों को इकट्ठा कर हिंसा फैलाने की योजना बनाई। बीते सोमवार को नागपुर के महाल इलाके में दो गुटों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इसके बाद देर रात हंसपुरी में भी हिंसा भड़की, जिसमें दुकानों में तोड़फोड़, वाहनों में आगजनी और भारी पथराव हुआ। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए, जिसके बाद पुलिस ने 60 से अधिक दंगाइयों को हिरासत में ले लिया और प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया।
औरंगजेब की कब्र विवाद ने कैसे पकड़ी आग?
नागपुर हिंसा की जड़ें औरंगजेब की कब्र को लेकर उठे विवाद से जुड़ी हैं। हाल ही में अभिनेता विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ रिलीज हुई, जिसमें औरंगजेब को लेकर कुछ दृश्यों ने बहस को जन्म दिया। इसके बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने औरंगजेब की कब्र हटाने का बयान दिया था, जिससे यह मुद्दा और गरमाने लगा। विवाद तब और बढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने औरंगजेब को "अच्छा शासक" बताते हुए कहा कि उनकी गलत छवि फिल्मों के जरिए गढ़ी जा रही है।
इसके बाद से विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग तेज कर दी। उन्होंने यहां तक धमकी दी कि अगर सरकार ने कब्र नहीं हटाई तो इसका अंजाम बाबरी मस्जिद जैसा होगा। इस विवाद के चलते नागपुर में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा और हिंसा भड़क उठी।
मुख्य आरोपी फहीम खान को 21 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजा गया।
उसके नागपुर स्थित घर के अवैध हिस्से पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया।
हिंसा फैलाने और भीड़ जुटाने के लिए उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
अब तक 60 से ज्यादा दंगाइयों को हिरासत में लिया गया।
प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।
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