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रेलवे बोर्ड के 119 सालों के इतिहास में पहला दलित चेयरमैन, क्या राहुल की मुहिम रंग ला रही है?

दलित, आदिवासी और पिछड़ों के उत्थान को अपना लक्ष्य बना चुके राहुल गाँधी की मुहीम पर श्रीनेत ने कहा कि मंजिल अभी बहुत दूर है, लेकिन राहुल गांधी ने सफ़र को नयी दिशा दे दी है।

रेलवे बोर्ड के 119 सालों के इतिहास में पहला दलित चेयरमैन, क्या राहुल की मुहिम रंग ला रही है?
फोटो: रेलवे बोर्ड के 119 सालों के इतिहास में पहला दलित चेयरमैन, क्या राहुल की मुहिम रंग ला रही है?
आख़िरकार रेलवे बोर्ड में 119 साल बाद अध्यक्ष के पद पर पहली बार किसी दलित को जगह मिली है। 1986 बैच के रेलवे मैकेनिकल इंजीनियर सतीश कुमार को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया गया है। वह जया वर्मा की जगह लेंगे, जिन्हें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण यानी कैट का प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किया गया है। जया भी पहली महिला रही है, जिन्हे अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गयी थी। गौर करने वाली बात है कि कुमार की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश में दलित और आरक्षण राजनीतिक चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए है। मौजूदा समय में कुमार रेलवे बोर्ड के सदस्य है, पदोन्नति के आधार पर उन्हें सीईओ के पद पर चुना गया है। कुमार 1 सितंबर को एक वर्ष के लिए अपना कार्यभार संभालेंगे। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से इसकी जानकारी मंगलवार को दी गयी।

कांग्रेस प्रवक्ता और सोशल मीडिया एंड डिजिटल मीडिया प्रभारी सुप्रिया श्रीनेत ने कुमार को अध्यक्ष चुने जाने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी के मुहिम की जीत बताया। श्रीनेत ने कहा कि न सिर्फ रेलवे बोर्ड में बल्कि मीडिया में भी दलित, आदिवासी और पिछड़ों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दलित, आदिवासी और पिछड़ों के उत्थान को अपना लक्ष्य बना चुके राहुल गाँधी की मुहिम की ओर ध्यान दिलाते हुए श्रीनेत ने कहा कि मंजिल अभी बहुत दूर है, लेकिन राहुल गांधी ने सफ़र को नयी दिशा दे दी है।

अक्सर राहुल गाँधी संसद से लेकर सार्वजनिक जगहों पर पीडीए(पिछड़े, दलित और आदिवासी) के हक़ की बातें कहते हुए नज़र आते है। विपक्ष के नेता का कहना है कि पीडीए के लोगों को उनका हक़ नहीं दिया जा रहा है। अगर देश के संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल करना है तो देश में जातिगत जनगणना को करवाना होगा। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, तब तक यह पता नहीं चलेगा कि भारत के जातिगत आंकड़े क्या है, और किस वर्ग के विकास के लिए उसको और भी ज़्यादा प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है।


कौन हैं सतीश कुमार  

कुमार अपनी वर्तमान भूमिका में लोको पायलटों से जुड़े मुद्दों को देखते हैं। वह 2022 में उत्तर-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। रेलवे में 34 सालों के करियर में कुमार को कई बार सम्मानित भी किया गया है। कुमार ने मार्च 1988 में भारतीय रेलवे से अपना करियर शुरू किया और उसके बाद विभिन्न क्षेत्रों और डिवीजनों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने रेलवे नेटवर्क के भीतर नवाचार को बढ़ावा देने, परिचालन दक्षता में सुधार करने और सुरक्षा उपायों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।