मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दाख़िल किए गए आरोप पत्र में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें देव प्रकाश मधुकर (कार्यक्रम का मुख्य आयोजक), मेघ सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लधेते, उपेंद्र सिंह, संजू कुमार, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार और दलवीर सिंह हैं। खबरों के अनुसार, आरोपितों को अभी चार्जशीट में लगे आरोपों की प्रतियाँ नहीं दी गयी है। कोर्ट ने पुलिस को 4 अक्टूबर तक का समय दिया है।
इस साल 2 जुलाई को हाथरस के फुलराई गाँव में सूरजपाल के सत्संग में भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हो गयी थी। जिनमें 116 महिलाएं, दो बच्चे और 3 पुरुष शामिल थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस जाकर पीड़ितों को भरोसा दिलाया था कि घटना की बारीक़ी से जाँच होगी, और उसके पीछे किसी की साज़िश हुई तो उसे बख़्शा नहीं जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि मृतकों का 121 का आँकड़ा सरकारी की तरफ़ से पेश किया गया है। स्थानीय लोगों ने मृतकों की संख्या 300 से ज़्यादा होने का दावा किया था।
मायावती का सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने घटना को लेकर योगी सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ऐसे भविष्य में घटनाओं में रोक पाना संभव होगा? चार्जशीट के बाद से आम लोगों में चिंता का माहौल पैदा हो गया है। सूरजपाल पर सरकार की चुप्पी सही नहीं है।
आरोपपत्र में आरोपितों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं को शामिल किया गया है। इन धाराओं में विशेष रूप से 105 (ग़ैर इरादतन हत्या), 110 (ग़ैर-इरादतन हत्या करने का प्रयास), 126(2) (ग़लत तरीक़े से रोकना), 223 (किसी आदेश की अवज्ञा करना) और 238 (साक्ष्यों के ग़ायब होने का कारण) शामिल है।
पीड़ितों को मुआवज़ा मिले - राहुल गाँधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भगदड़ में मारे गये लोगों के परिजनों से मुलाक़ात कर घटना को लेकर संवेदनाएँ व्यक्त की थी। मुलाक़ात के बाद उन्होंने दुर्घटना का मुख्य ज़िम्मेदार प्रशासन को बताया था। राहुल का कहना था कि सत्संग में जिस तरह से भीड़ थी, अगर प्रशासन की तरफ़ से उचित व्यवस्था होती तो इस तरह की घटना को होने से बचाया जा सकता था। राहुल ने कहा था कि यह बात राजनीति के चश्मे से नहीं कह रहे है, बल्कि जो सच है वह बता रहे हैं। विपक्ष के नेता ने कहा था कि पीड़ितों को मुआवज़ा मिलना चाहिए, क्योंकि सभी पीड़ित ग़रीब तबक़े से है।





