सैलजा की ख़ामोशी ने हरियाणा की राजनीति में एक अलग हलचल को हवा दी हुई थी। कुछ दिनों पहले सैलजा ने एक निजी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में सभी अफवाहों और चर्चाओं को ताला लगाते हुए कहा कि वह कांग्रेस पार्टी को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाली। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि पार्टी में उनकी कुछ शिक़ायतें हैं, जिसकों वरिष्ठ नेताओं के सामने उठाया गया। इसके बावज़ूद वह पार्टी से कहीं नहीं जाने वाली है, क्योंकि उनकी नसों में कांग्रेस का ख़ून है। कांग्रेस सांसद ने हरियाणा का मुख्यमंत्री बनने के विकल्प पर कहा कि उनकी इच्छा भी यही है, लेकिन पार्टी में सभी को साथ लेकर चलना होता है। हालाँकि, उन्होंने पार्टी आलाकमान के सामने अपनी शिक़ायतें और बातें साफ़ तौर पर रखी। कुछ दिनों पहले कुमारी सैलजा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात की थी। इसके बाद से सैलजा की नाराज़गी सार्वजानिक तौर पर कम नज़र आयी।
गाँधी परिवार की क़रीबी हैं सैलजा
कुमारी सैलजा की गिनती गाँधी परिवार के करीबियों में होती है। सैलजा प्रदेश में टिकट बंटवारे को लेकर खुश नहीं है। ज़ाहिर है इस बार के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 90 सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में भूपिंदर सिंह हुड्डा की भूमिका मुख्य रही है। जबकि कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर सैलजा को आपत्ति थी। अब इस तस्वीर के जरिये कांग्रेस ने एक तरह से इस तरह की चर्चाओं पर विराम लगाने की भी कोशिश की है। तस्वीर यह बताती है कि गांधी परिवार के बीच सैलजा की अहमियत कम नहीं हुई है। गांधी परिवार और पार्टी पर सैलजा की पकड़ बरकरार है। तस्वीर में देखें तो प्रियंका गांधी के बाद कुमारी सैलजा, राहुल गांधी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और फिर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर अपने आप पूरी कहानी बयान कर रही है। यह इस बात का संकेत है कि पार्टी आलाकमान नहीं चाहता है कि पार्टी के अंदरूनी मामलों का कोई बहरी व्यक्ति फ़ायदा उठाए, यही कारण है कि नराज़गियों और मतभेदों के बाद भी सैलजा और हुड्डा साथ-साथ नज़र आए।





