छापेमारी के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने कहा, "ईडी के अधिकारी सुबह करीब साढ़े सात बजे मेरे आवास पर पहुंचे, मैं उस समय अखबार पढ़ रहा था। मैंने उनका स्वागत किया और उनसे पूछा कि क्या उनके पास तलाशी वारंट है। जब मैंने फोन के बारे में पूछा तो मैंने उसे देने से मना कर दिया।"
बघेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि "वे चुनाव आयोग की अनुमति के बिना मेरे आवास पर छापा मारने आए और अपने साथ एक मशीन भी लाए ताकि मीडिया में सनसनी फैलाई जा सके। उनके पास मेरे खिलाफ कुछ भी नहीं है। उन्होंने मेरे घर से केवल 33 लाख रुपये बरामद किए, जो कि परिवार की नकद बचत, स्त्रीधन और कृषि आय है। मैं इसका पूरा विवरण देने के लिए तैयार हूं।"
उन्होंने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रच रही है और ईडी को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। बघेल ने कहा, "मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं और न ही मैंने किसी समन से इनकार किया है। चार साल से जांच चल रही है, लेकिन अब तक उन्हें कुछ नहीं मिला।"
भूपेश बघेल का केंद्र सरकार पर हमला: 'मुझे बदनाम करने की कोशिश'
भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "इस कार्रवाई का मकसद केवल मुझे बदनाम करना है। वे मुझसे चुनाव से पहले डर गए हैं और अब ईडी जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करके मुझे फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मेरे घर से 33 लाख रुपये बरामद हुए हैं, जो कि परिवार के स्त्रीधन, नकद बचत और कृषि आय का हिस्सा है। मैं इसका पूरा हिसाब देने को तैयार हूं। लेकिन भाजपा और उनकी सरकार मुझ पर कीचड़ उछालने के लिए इस तरह की साजिश रच रही है।"
भूपेश बघेल ने ईडी अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने उनके घर से कोई ईसीआईआर (Enforcement Case Information Report) नंबर भी उपलब्ध नहीं कराया और यह दिखाता है कि उनके पास मेरे खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा, "मैंने पूछा कि आपके पास ईसीआईआर नंबर है या नहीं? उन्होंने जवाब नहीं दिया। फिर भी वे छापेमारी कर रहे थे।"
ईडी ने किया छापेमारी का बचाव, कहा- 2,161 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच जारी
दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में शराब के अवैध कारोबार से जुड़े कथित घोटाले में बड़ी अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में यह छापेमारी की गई। ईडी के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच करीब 2,161 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का मामला सामने आया है।
ईडी ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और शराब कारोबारियों के गठजोड़ के जरिए राज्य में शराब बिक्री पर एक बड़ा सिंडिकेट चलाया गया। इसके तहत सरकारी दुकानों के जरिए शराब बिक्री और वितरण को नियंत्रित किया गया और भारी मात्रा में कमीशन के नाम पर धन की हेराफेरी की गई।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर कुल 14 जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उनके बेटे चैतन्य बघेल और अन्य के आवास भी शामिल थे।
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