स्टालिन ने सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए घोषणा की कि "कॉलोनी" शब्द को सभी सरकारी दस्तावेजों और सार्वजनिक उपयोग से हटाया जाएगा। वीसीके विधायक सिंधनई सेलवन के सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “यह शब्द वर्षों से अनुसूचित जातियों के लोगों को stigmatize करता रहा है। यह उत्पीड़न और अस्पृश्यता का प्रतीक बन गया है, और अब इसे पूरी तरह से मिटा दिया जाएगा।”
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए स्टालिन ने कहा, “हमारे राज्य में अगर कोई आपराधिक घटना होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। यह न तो मणिपुर है, न ही कश्मीर। यहां यूपी के कुंभ मेले जैसी मौतें नहीं होतीं। यह तमिलनाडु है, इसे मत भूलिए।”
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 6 सितंबर को अब 'पुलिस दिवस' के रूप में मनाया जाएगा, जिससे पुलिसकर्मियों की सेवा को सम्मान मिल सके।
राज्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए स्टालिन ने कहा, “हमने ये उपलब्धियां आसानी से नहीं पाई हैं। एक ओर केंद्र सरकार और दूसरी ओर राज्यपाल का दबाव है। ऊपर सांप है, नीचे लोमड़ी—भागो तो दीवार। इन बाधाओं के बावजूद हमने प्रगति की है।” मुख्यमंत्री ने राज्य की शैक्षणिक उपलब्धियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में पीएचडी करने वाले छात्रों की संख्या देश में सबसे अधिक है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
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