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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्रॉस-वोटिंग, BJP की तरफ़ से मेयर बने हरप्रीत बाबला, कॉंग्रेस-आप की हार

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की और पार्टी की उम्मीदवार हरप्रीत बाबला ने कुल 19 वोटों के साथ यह चुनाव जीत लिया। उनके मुकाबले आम आदमी पार्टी |

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्रॉस-वोटिंग, BJP की तरफ़ से मेयर बने हरप्रीत बाबला, कॉंग्रेस-आप की हार
फोटो: Chandigarh mayor election, Harpreet Babla
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की, और पार्टी की उम्मीदवार हरप्रीत बाबला ने कुल 19 वोटों के साथ यह चुनाव जीत लिया। उनके मुकाबले, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार प्रेमलता को केवल 17 वोट ही मिल पाए। हरप्रीत बाबला पहले भी चंडीगढ़ निगम की पार्षद रह चुकी हैं, और इस बार वे मेयर के रूप में चुनी गईं। बाबला सेना के रिटायर्ड कर्नल की बेटी हैं और पूर्व पार्षद देविंदर सिंह बाबला की पत्नी हैं। उन्होंने पहले कांग्रेस पार्टी में काम किया था, लेकिन अब भाजपा से जुड़ी हुई हैं। 

 चुनाव में क्रॉस वोटिंग की भी खबरें आई हैं, क्योंकि भाजपा के पास 16 पार्षदों का समर्थन था, फिर भी उसे तीन अतिरिक्त वोट मिले। यह संकेत करता है कि कुछ अन्य दलों के पार्षदों ने भी भाजपा का समर्थन किया, जिससे भाजपा को अप्रत्याशित बढ़त मिली। इस बार मेयर का पद महिला पार्षद के लिए आरक्षित था, इसलिए दोनों प्रमुख दलों ने महिला उम्मीदवारों को ही उतारा था। हरप्रीत बाबला के पति देविंदर सिंह बाबला ने चुनावी परिणाम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा को पहले से विश्वास था कि जीत उनकी होगी, और उन्होंने पूर्व मेयर कुलदीप कुमार पर आरोप लगाया कि वे केवल अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए काम कर रहे थे, जिसके कारण उनके साथ काम कर रहे पार्षद भी नाराज थे। 

बाबला का कहना था कि इन पार्षदों की नाराजगी का असर चुनाव पर पड़ा और उनके समर्थन के कारण भाजपा को वोट मिले। इस चुनाव में सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि कुलदीप कुमार, जो इस समय तक मेयर थे, को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किए जाने का खतरा था। हालांकि, अदालत से उन्हें राहत मिलने के बाद वे भी मतदान में शामिल हुए। चुनाव में मतदान सीक्रेट बैलट के माध्यम से हुआ, और सभी मतदाताओं को आदेश दिया गया था कि वे अपना बैलट पेपर किसी को न दिखाएं। इसके अलावा, मतदान स्थल पर मोबाइल फोन, कैमरा, हथियार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स लेकर जाने पर पाबंदी थी, ताकि चुनाव में कोई गड़बड़ी न हो।

 चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 सदस्य होते हैं, जिनमें भाजपा के 16 पार्षद हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के पास 13 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। दोनों दलों ने गठबंधन कर रखा है, और उनका कुल समर्थन 19 पार्षदों का है। इसके अलावा, कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी का वोट भी इस चुनाव में शामिल था, जिससे दोनों दलों का गठबंधन कुल 20 वोटों के साथ अपने पक्ष में था। इस चुनाव के परिणामों से भाजपा की स्थिति और मजबूत हुई है, और यह संकेत देता है कि पार्टी ने चंडीगढ़ में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए रणनीतिक तरीके से चुनावी मैदान में उतरने की योजना बनाई थी। यह जीत न केवल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पार्टी की प्रदेश में बढ़ती ताकत को भी दर्शाता है।

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