आसिम मलिक के कद में लगातार वृद्धि हो रही है और अब वह आईएसआई प्रमुख के पद पर भी बने रहेंगे। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान की सुरक्षा और खुफिया नीति का संचालन भी अब उनके हाथों में होगा। उनकी यह नियुक्ति पाकिस्तान में सेना की पकड़ को और मजबूत करने के संकेत देती है।
आसिम मलिक पंजाब के सरगोधा जिले से हैं और उनका परिवार भी लंबे समय से पाकिस्तानी सेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल गुलाम मोहम्मद मलिक भी पाकिस्तान की सेना में उच्च पद पर रहे थे। आसिम मलिक ने 1989 में पाकिस्तानी सेना की बलोच रेजिमेंट में शामिल होकर अपना करियर शुरू किया था। उन्होंने बलूचिस्तान यूनिवर्सिटी से 1999 में बीएससी की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन में भी अध्ययन किया। वह रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी पढ़ाई कर चुके हैं और पाकिस्तान की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी की है।
आसिम मलिक की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्ति को लेकर कई बातें चल रही हैं। एक विचार यह है कि उन्हें यह पद इमरान खान के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर करने के बदले में दिया गया है। दरअसल, आसिम मलिक ने इमरान खान के करीबी माने जाने वाले पूर्व आईएसआई प्रमुख फैज हमीद के खिलाफ चल रहे एक केस की निगरानी की थी। इसके अलावा, 9 मई को इमरान खान के समर्थकों द्वारा किए गए प्रदर्शनों और हिंसा की जांच भी उनके अधीन हुई थी। इन घटनाओं के बाद उनके प्रभाव में वृद्धि हुई है और अब वह पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पाकिस्तान के सैन्य हलकों में यह चर्चा भी है कि आसिम मलिक को यह जिम्मेदारी इस कारण दी गई है क्योंकि वह अगले पाकिस्तानी आर्मी चीफ बनने के लिए एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
इस समय तक आईएसआई प्रमुख का पद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद एक साथ संभालने वाले आसिम मलिक के प्रभाव में निरंतर वृद्धि हो रही है।
आसिम मलिक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान के भीतर सैन्य शक्ति और सुरक्षा नीति का नियंत्रण पूरी तरह से सेना के हाथों में रहेगा। इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीति पर सेना का दबदबा बढ़ सकता है, जो कि भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।
आसिम मलिक का सैन्य करियर भी बहुत ही शानदार रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1989 में की थी और उनकी यात्रा अब तक एक प्रभावशाली रही है। उनका संबंध पाकिस्तानी सेना से गहरे तरीके से जुड़ा है और उनकी सैन्य और सुरक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट विशेषज्ञता है। उनका पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर गहरा असर पड़ेगा, और साथ ही पाकिस्तान की सैन्य नीतियों में उनके फैसले महत्वपूर्ण होंगे।





