भारत में पहला बजट 7 अप्रैल, 1860 को जेम्स विल्सन द्वारा प्रस्तुत किया गया था। विल्सन भारत परिषद के वित्त सदस्य थे, जो भारतीय वॉयसराय को सलाह देते थे। वे एक स्कॉटिश व्यवसायी, अर्थशास्त्री और उदार राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने द इकोनॉमिस्ट और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की स्थापना की थी।
स्वतंत्र भारत का पहला बजट
आजादी के बाद पहला बजट 26 नवंबर यानी लगभग तीन महीने बाद पेश हुआ था। इसे देश के प्रथम वित्त मंत्री आर.के षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था। तब से हर साल हमारे देश में बजट पेश किया जा रहा है। देश के पहले बजट में खर्च का अनुमान 197.29 करोड़ रुपये था। ब्रिटिश काल में केंद्रीय बजट शाम पांच बजे पेश किया जाता था, क्योंकि उस समय इंग्लैंड में दिन के 11:30 बजे का समय होता है। यह बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। भारत की आजादी के बाद यही परंपरा 1999 तक चली। लेकिन 1999 की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदल दिया। तब से आज तक सुबह 11 बजे बजट पेश होता है। वहीं, फरवरी महीने के अंतिम दिन पर बजट पेश करने की औपनिवेशिक परंपरा के विपरीत अरुण जेटली ने 2017 से 1 फरवरी को बजट पेश करना शुरू किया दिया।
सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड
सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है। उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए 10 बार बजट पेश किया था। उसके बाद पी. चिदंबरम के नाम 9 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री रहते हुए आठ बार बजट पेश किया था। लेकिन, लगातार सबसे ज्यादा 7 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज हो जाएगा। उन्होंने अपना पहला बजट 2019 में पेश किया था। 2019 में लोकसभा चुनाव के कारण केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था।

बजट की कुछ रोचक बातें
मोरारजी देसाई को कर लगाने में मज़ा आता था। 1968 में उन्होंने कहा, “अब मैं अपने बजट भाषण के सबसे डरावने हिस्से पर आता हूं। मुझे विश्वास है कि माननीय सदस्य मुझे फटकार नहीं लगायेंगे।”
वित्त मंत्री के रूप में वी.पी. सिंह ने गरीबों को कई रियायतों दी थी। 1986 के अपने बजट में उन्होंने रेलवे कुलियों, रिक्शा चालकों, मोचियों के लिए सब्सिडी के साथ बैंक ऋण और एक लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना, नगर पालिका सफाई कर्मचारियों के लिए दुर्घटना बीमा योजना जैसी तमाम योजनाओं का प्रस्ताव रखा था।
अभी तक का सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम है। उन्होंने वर्ष 2020-21 बजट के लिए दो घंटे 42 मिनट का भाषण दिया था। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2003 में एनडीए सरकार के तात्कालिक वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के नाम था। उन्होंने दो घंटे 15 मिनट का भाषण दिया था। वहीं शब्दों के लिहाज से मनमोहन सिंह की ओर से 1991 में दिया गया बजट भाषण सबसे लंबा था। यह 18700 शब्दों का था और शब्दों के लिहाज से सबसे छोटा बजट भाषण वाई बी चव्हाण ने 1974 में दिया था, जो केवल 9300 शब्दों का था।





