मंत्री पद न मिलने पर भुजबल ने अजित पवार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि फडणवीस उन्हें कैबिनेट में लेना चाहते थे, लेकिन अजित पवार ने रोक दिया। एनसीपी में सारे फैसले अजित पवार ही लेते हैं। भुजबल ने स्पष्ट किया, 'जहां चैन नहीं, वहां रहना नहीं'। उन्होंने कहा कि वह अपने आगे के कदम के बारे में एनसीपी कार्यकर्ताओं और येवला सीट के लोगों से विचार-विमर्श के बाद ही फैसला लेंगे।
इससे पहले कई ओबीसी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भुजबल से मुलाकात की। मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से नाराज होकर वह राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में भी नहीं गए। उन्होंने मीडिया को बताया कि राज्य भर से आए ओबीसी नेताओं ने मुंबई में बैठक की और उनसे मिले। मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने पर सभी हैरान थे। संगठनों ने भुजबल के हर फैसले का समर्थन करने का वादा किया है।
'क्या मैं खिलौना हूं?'
भुजबल ने बताया कि पहले उन्हें नाशिक से लोकसभा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया गया, जिसे उन्होंने मान लिया। जब राज्यसभा जाना चाहा तो विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा गया। अब मंत्री पद नहीं दिया तो राज्यसभा सीट का प्रस्ताव आ रहा है। उन्होंने आवेश में कहा, "क्या मैं खिलौना हूं? आप कहें तो खड़ा हो जाऊं, कहें तो बैठ जाऊं? मेरे क्षेत्र के लोग क्या सोचेंगे?"





