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राष्ट्रीय • दिल्ली

सरकार ने चावल से एथेनॉल उत्पादन की सीमा तय की, मक्के की मांग बढ़ने की संभावना

2026-27 में मक्के की मांग 1.6 करोड़ टन तक पहुँचने का अनुमान

सरकार ने चावल से एथेनॉल उत्पादन की सीमा तय की, मक्के की मांग बढ़ने की संभावना
फोटो: Government Sets Limits on Ethanol Production from Rice, Anticipates Increased Demand for Corn

चावल के उपयोग पर नई सीमा

केंद्र सरकार ने एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के उपयोग पर रोक लगाने के बाद अब चावल से एथेनॉल बनाने की सीमा भी निर्धारित की है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, एथेनॉल उत्पादक कंपनियों की निर्भरता मक्के पर बढ़ने की संभावना है। उद्योग विशेषज्ञों की भविष्यवाणी के अनुसार, 2026-27 में एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की मांग लगभग 1.6 करोड़ टन तक पहुंच सकती है, जबकि चालू वर्ष में यह लगभग 1.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है।


सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अतिरिक्त चावल और खराब अनाज से एथेनॉल बनाने की मात्रा को सीमित कर दिया है। तीन नवंबर को जारी संशोधित टेंडर की शर्तों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तीन तिमाहियों में एफसीआई के अतिरिक्त चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकेगा। साथ ही, खराब खाद्यान्न से एथेनॉल उत्पादन की वार्षिक सीमा 160 करोड़ लीटर निर्धारित की गई है।


उत्पादकों के लिए शर्तें

एथेनॉल उत्पादन में एफसीआई के अतिरिक्त चावल के उपयोग पर सरकार ने विभिन्न सीमाएं निर्धारित की हैं। किसी भी एथेनॉल उत्पादक को अपनी एक तिमाही की कुल पेशकश में 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा एफसीआई के चावल से बने एथेनॉल का नहीं रखना होगा। इस स्रोत से सभी कंपनियों को मिलाकर हर तिमाही अधिकतम 108 करोड़ लीटर एथेनॉल का आवंटन किया जाएगा। यदि कोई कंपनी निर्धारित सीमा से अधिक पेशकश करती है, तो तेल विपणन कंपनियां सभी बोलीदाताओं की पात्र मात्रा में आनुपातिक कटौती करेंगी।


सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के लिए 72 लाख टन अतिरिक्त चावल भी आवंटित किया है, जो 30 जून 2027 तक वैध रहेगा। खराब खाद्यान्न से बने एथेनॉल की सीमा भी 160 करोड़ लीटर तय की गई है, जो कुल टेंडर का लगभग 14.5 प्रतिशत है। तेल कंपनियां सप्लाई वर्ष के दौरान इस स्रोत से प्रत्येक तिमाही में अधिकतम 40 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद सकेंगी।


गन्ने के एथेनॉल उत्पादन पर पहले से रोक

सरकार ने पहले ही 2026-27 के आपूर्ति वर्ष में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के उपयोग पर रोक लगा दी थी। यह आपूर्ति वर्ष नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक चलेगा। एथेनॉल कार्यक्रम की शुरुआत में चीनी उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जहां चीनी मिलें गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाती थीं।


हालांकि, उत्पादन में गिरावट को देखते हुए, 16 अक्टूबर को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के माध्यम से नया खरीद टेंडर जारी किया गया था, जिसमें एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के उपयोग को शून्य करने के निर्देश दिए गए थे। इसी संदर्भ में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी उत्पादक राज्यों को भी इन माध्यमों का उपयोग न करने का निर्देश दिया।


मक्के की मांग में वृद्धि की संभावना

गन्ने और चावल से एथेनॉल उत्पादन पर लगाई गई सीमाओं के परिणामस्वरूप मक्के की आवश्यकता में वृद्धि की संभावना है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 में एथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग 1.6 करोड़ टन मक्के की जरूरत पड़ सकती है, जबकि चालू वर्ष में इसकी मांग लगभग 1.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है।


एक टन मक्के से लगभग 380 लीटर एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। इस हिसाब से मक्के की मांग में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।