प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में मंच से विदेशी सामान न बेचने की अपील व्यापारियों से की थी। लेकिन आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं।
2018-19 में भारत ने 70 अरब डॉलर का आयात चीन से किया था,
जो 2023-24 तक बढ़कर 101 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
इसके मुकाबले भारत का निर्यात चीन को महज 16 अरब डॉलर प्रतिवर्ष के आसपास ही रहा है।
गौरतलब है कि 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भी चीन के सामान के बहिष्कार का व्यापक अभियान चला था। स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि उस समय देश में एक सकारात्मक लहर बनी थी, लेकिन समय के साथ उसका असर कमजोर पड़ गया।
महाजन ने कहा, "अगर हम चीन के उत्पादों की जगह भारतीय वस्तुओं का उपयोग करें, तो इससे चीन की अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा और हमारे देश के कारोबारियों को नया जीवन मिलेगा।"
SJM अब इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान चलाने जा रहा है, जिसमें उपभोक्ताओं को यह बताया जाएगा कि चीनी वस्तुओं से परहेज करके वे न सिर्फ देश की सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं, बल्कि भारतीय उद्यमियों को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।





