प्रेस वार्ता में जब एक महिला पत्रकार ने राहुल गांधी के बयान के संदर्भ में सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में पाकिस्तान से समझौता किया, तो थरूर ने स्पष्ट कहा, “हम अमेरिका के राष्ट्रपति पद का सम्मान करते हैं। हमारा अमेरिका के साथ एक गहरी रणनीतिक साझेदारी है। लेकिन भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष से मध्यस्थता की मांग नहीं की है।”
थरूर ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की भाषा में बात करता रहेगा, भारत उसी भाषा में जवाब देगा।
“अगर पाकिस्तान आतंकवाद का ढांचा नष्ट करता है और यह दिखाता है कि वह भारत से सामान्य संबंध चाहता है, तो बातचीत संभव है – लेकिन उसके लिए भी किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं होगी।”
थरूर ने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया था कि यदि वे हमलों को रोकते हैं, तो भारत भी जवाबी कार्रवाई रोक देगा।
“अगर अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा कि वह रुक जाए, क्योंकि भारत तैयार है, तो यह अमेरिका की तरफ से एक सकारात्मक संकेत था। लेकिन वास्तव में क्या हुआ, यह पाकिस्तान ही बता सकता है।”
राहुल गांधी ने 3 जून को भोपाल में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था, “मैं बीजेपी और आरएसएस वालों को जानता हूं। थोड़ा दबाओ तो डरकर भाग जाते हैं। ट्रंप ने फोन किया और कहा – नरेंदर, सरेंडर, और मोदी जी ने ‘जी हुज़ूर’ कह दिया।” राहुल गांधी के इस बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि भारतीय सेना के साहस और पराक्रम को ‘सरेंडर’ कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सेना और 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है। अगर कोई पाकिस्तानी भी ऐसा कहता, तो हम उस पर हंसते। लेकिन राहुल गांधी का ऐसा कहना देशद्रोह से कम नहीं। नड्डा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान में बड़ी तबाही मचाई, और इसके बाद खुद पाकिस्तान ने युद्धविराम का अनुरोध किया था।





