चिट्ठी में अख्तरुल ईमान ने लिखा, “आप भलीभांति जानते हैं कि AIMIM वर्ष 2015 से बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही है। हमारा प्राथमिक उद्देश्य यह रहा है कि चुनावों में सेक्युलर वोटों का बिखराव न हो। यह एक निर्विवाद तथ्य है कि इसी बिखराव का लाभ उठाकर सांप्रदायिक ताकतें सत्ता में आती रही हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि पूर्व के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं हो सका। अब जबकि बिहार एक बार फिर चुनावी मोड़ पर है, AIMIM एक बार फिर गठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ना चाहती है।
ईमान ने चिट्ठी में इस प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताते हुए लिखा, “अगर हम सब मिलकर आगामी चुनाव लड़ते हैं, तो सेक्युलर वोटों के बिखराव को रोका जा सकता है और मुझे विश्वास है कि इससे बिहार में अगली सरकार महागठबंधन की ही बनेगी।”
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने RJD, कांग्रेस और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेताओं से फोन और व्यक्तिगत तौर पर संपर्क भी किया है, जिसकी चर्चा मीडिया में भी हो रही है। उन्होंने लालू यादव से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लें।
AIMIM ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल क्षेत्र की पांच मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत हासिल कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया था। इन सीटों पर जीत ने पार्टी को राज्य में एक उभरती ताकत के रूप में स्थापित किया था। हालांकि, जून 2022 में बड़ा झटका लगा जब पार्टी के पांच में से चार विधायक RJD में शामिल हो गए। सिर्फ अख्तरुल ईमान AIMIM में बने रहे और पार्टी के प्रति निष्ठावान रहे। इस राजनीतिक पलटी ने AIMIM के बिहार में विस्तार की योजना को भारी नुकसान पहुंचाया।





