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स्वस्थ भारत की कल्पना अब मुझे दूर की कौड़ी लगती है । जहाँ मोदी साहब हर जगह सब कुछ सही होने का दावा ठोक रहें हैं वहीं जमीनी हकीकत उनके तमाम दावों को खोखला कर देती है।

ताज़ा उदाहरण मध्य प्रदेश का मिला जहाँ लोक सहभागी साझा मंच ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश के 13 जिलों के 15 विकासखंडों में एक अध्ययन किया। इसमें 27 गांवों के सभी 3813 परिवारों को शामिल किया गया। उनके अध्ययन से यह बात स्पष्ट हुई कि अभी भी एक बड़ी जनसंख्या के लिए खाद्यान्न हासिल करना एक चुनौती है।

अध्ययन के मुताबिक इन गांवों के 2860 परिवार उचित मूल्य पर राशन पाने के पात्र हैं, लेकिन पात्र होते हुए इन गांवों के 592 परिवार इस योजना से छूटे हुए हैं।

दुकानों का समय पर नहीं खुलना, दुकान दूर होने से पूरे दिन राशन लाने में बर्बाद होना, नहीं मिलने पर दोबारा जाना जैसी समस्याएं गरीब परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा से बाहर कर देती हैं।और तो और लोगों ने राशन के गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं और 66 परिवारों ने खराब राशन मिलना बताया।

भोजन के अधिकार को लेकर देश भर में चले लंबे आंदोलन के बाद 10 सितंबर 2013 को लागू किया गया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से अब भी लाखों लोग वंचित हैं और हम सुन रहे हैं तो सिर्फ पाकिस्तान और बस पाकिस्तान। देश की गरीब मजबूर और भूखी जनता भी सरकार का समर्थन करने को लाचार है।

calender  03 Oct 2019

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