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झारखण्ड में 35 साल की आदिवासी महिला बलात्कार के समय पीटने से कोमे में रही, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण पीड़िता की मौत!

बलात्कार की बढ़ती घटनाएं और प्रशासन का रेप पीड़िता के प्रति असंवेदनशील रवैया, वन स्टॉप रेप क्राइसिस सेन्टर की कमी, आखिर कब मिलेगा न्याय?
झारखण्ड में 23 जनवरी को, 35 साल की आदिवासी महिला के साथ तीन व्यक्तियों द्वारा बलात्कार किया गया,जोकि ऊंची जाति से थे। महिला को इतना पीटा गया कि उसे अधमरी हालात में खेत मे छोड़ दिया। पीड़िता के ब्रेन मे गहरी चोटें और शरीर के कई हिस्सो में टाँके आये थे। महिला के मुँह के अंदर कपड़ा ठुसने के कारण गले तक इंफेक्शन हो गया था।
पीड़िता अब तक कोमे मे रही।
सरकारी अस्पताल में रेप की पुष्टि होने के बाद भी पुलिस द्वारा मेडिकल नही कराया गया। और जाँच में देरी की गई। अब तक आरोपियों के खिलाफ़ चार्जशीट तक दायर नही की गई।
रांची स्थित रिम्स अस्पताल में प्रशासन द्वारा पीड़िता मे कोई सुधार नही होने का बहाना बनाकर कोमे में होने के बावजूद पीड़िता के परिवार वालो को दूसरे अस्पताल ले जाने को मजबूर किया गया। दूसरे लातेहार जिला अस्पताल में कई दिनों तक प्रशासन को पता ही नही था कि अस्पताल में कोई रेप पीड़िता भर्ती है। अस्पताल में कहा गया कि पीड़िता को वापस रिम्स अस्पताल लेकर जाओ। इस अस्पताल में भी लापरवाही के कारण पीडिता के सीने में इंफेक्शन फैल गया। आख़िरकार वापस रिम्स में भर्ती कराया गया, जहाँ तकरीबन 4 महीने कोमे में रहने के बाद 23 मई को पीड़िता की मौत हो गई।
पीड़िता को कई दिन बाद इलाज के लिए 20,000 रूपए दिए गए। जो कि सरकार द्वारा तत्काल मदद के लिए दिए जाने चाहिए थे। प्रशासन द्वारा टिप्पणी की गई , कहा गया कि जब रेप का पता चलेगा तभी तो मदद देंगे।
गंभीर हालत होते देख लगातार दबाव व हाईकोर्ट की फटकार के बाद इलाज के लिए 2 लाख रुपए दिए गए, जबकि इलाज में 4.5 लाख रुपये खर्च हुए हैं। जिसमे महिला के पति जोकि गुजरात मे मजदूरी करते हैं, उन्हें इलाज के पैसे के लिए जमीन गिरवीं रखनी पड़ी। आखिर पीड़िता को मुफ्त इलाज क्यों नही दिया गया? सरकारी अस्पताल होने के बावजूद इतने पैसे क्यूँ लिए गए?
वहीं, झारखंड मे डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथोरिटी को इस घटना की जानकारी होने के बावजूद पीड़िता को सहायता नही दी गई। क्या इसलिए सहायता नही दी गई क्योंकि महिला आदिवासी और मजदूर थी?
निर्भया केस के समय, महिलाओं ने ही संघर्ष करके वन स्टॉप रेप क्राइसिस सेंटर खोले जाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया था, इन सेंटर के तहत पीड़िता को एक जगह कानूनी कार्यवाही, देखभाल, इलाज दिया जाना चाहिए, जोकि आज तक जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से नही चलाए जा रहे। जहाँ ये घटना हुई वहाँ भी रेप क्राइसिस सेंटर की सुविधा नही थी।
झारखंड में 2011 से 2018 में बलात्कार के 8,466 मामले दर्ज हुए, इस साल झारखंड में जनवरी से फरवरी तक 226 बलात्कार के मामले आ चुके हैं। ये वे मामले हैं जो दर्ज हुए बाकी कितने मामले ऐसे हैं जो दर्ज ही नही होते। इस तरह की घटनाएं सिर्फ झारखंड में नही, पूरे देश मे बढ़ रही है। ज्यादातर आदिवासी,मज़दूर, गरीब महिलाएं शोषण,उत्पीड़न ,बलात्कार का शिकार होती हैं।
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि आखिर क्यों लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद काम की जगहों में, सड़को पर ,खेतो में व सार्वजनिक जगहों पर अब तक सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के कड़े इंतजाम नही किये गए हैं, और न ही ठोस प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू किया गया है। आरोपी ऊँची जाति से थे, आखिर कब तक ऊँची जाति द्वारा नीची जाति पर दमन होता रहेगा?
चाहे कोई भी सरकार कितनी ही महिलाओं की सुरक्षा, न्याय के कितने ही तथाकथित वायदे कर लें, लेकिन इस तरह की बढती घटनाएं और पीडिताओं के लिए न्याय की लच्चर, घटिया व्यवस्था दिखाती है कि ये सरकारें असंवेदनशील, क्रूर, महिला विरोधी हैं, जो सिर्फ महिलाओं के वोट के लिए राजनीति करती आयीं हैं। आदिवासी मजदूर महिला की लापरवाही के कारण मौत दिखाती है कि इन सरकारों को नही फर्क पड़ता, उत्पीड़ित गरीब महिलाओं को न्याय मिले या न मिले, ये महिलाऐं जीएं या मरे।
इन सरकारों की पिछलग्गू मीडिया भी ऐसे घटनाओं को सामने नही लाती जबकि ऐसी गैरवाजिब खबरों को दिखाना ही इनका काम है जिनसे इनकी लोकप्रियता बढ़े।
हकीकत में बहुत शर्मनाक बात है कि न्याय तो दूर की बात परिवार व पीड़िता को अपने इलाज के लिए इधर से उधर चक्कर काटने को मजबूर किया जाता है। पीड़िता को One stop rape Crises Center तक भी उपलब्ध नही कराया जाता है। इन्हें न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। प्रशासन का असंवेदनशील व ढीला रवैया होते हुए महिलाओं के लिए बदलाव होता नजर नही आता। अंत मे स्थिति वही रहती है आये दिन महिलाओं पर शोषण,उत्पीड़न, अत्याचार की घटनाएं कम नही होती, फिर से इन्हें दुखद परिस्थिति, घटिया व्यवस्था, खराब प्रशासन का सामना करना पड़ता है।

calender  11 Jun 2019

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