हर रोज होते शहीदों पर ... | Raise Your Voice
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उस माँ के दर्द मैं कैसे बयान करू जिसने कभी उसको दूध पिलाया था,
कुछ दिन पहले ही तो सिर पर सेहरा भी सजाया था।

आज उसी माँ के दिल के टुकड़ेे की तिरंगे में लिपटी लाश आ रही है,
दुनिया के लिए तो शहिद पर उस माँ की तो बुढ़ापे की सारी आस जा रही है।

बाप भी पत्थर दिल करके बेटे ही शहादत पर नाज कर रहा है,
किसी और के दिल पर ऐसी ना बीते बस यही फरियाद कर रहा है।

सुखी ही नही थी जिसके हाथों की मेहंदी वो कोने में होकर बेहोस बैठी है,
अब कौन बताए उसको की उसके सपने तो लिपटकर तिरंगे में लाश लेटी है।

calender  14 Jun 2018

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