कश्मीर के भाजपा नेताओं को आशा थी कि 370 हटने पर राजनीति चमकेगी, पर वे घरों में दुबके हुए हैं
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कश्मीर के भाजपा नेताओं को आशा थी कि 370 हटने पर राजनीति चमकेगी, पर वे घरों में दुबके हुए हैं

By ThePrint(Hindi) calender  27-Aug-2019

कश्मीर के भाजपा नेताओं को आशा थी कि 370 हटने पर राजनीति चमकेगी, पर वे घरों में दुबके हुए हैं

श्रीनगर: भाजपा कार्यकर्ता फारूक खान ने कुरान के बारे में संसद भवन पर हमले के साजिशकर्ता मसूद अजहर से जाना. फारूक को ये जानकारी तब मिली जब वो मसूद के साथ जम्मू के जेल में बंद था.
फारूक पहले हरकत उल मुजाहिद्दीन का कमांडर था लेकिन पिछले साल ही उसने भाजपा ज्वाइन कर ली थी. खान ने पिछले साल अक्टूबर में पंचायत चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो असफल रहा था. खान अपनी राजनीतिक कैरियर को बढ़ाना चाहता है.
लेकिन अब फारूक को हिजबुल मुजाहिद्दीन से लगातार धमकियां मिल रही हैं. जिसके कारण खान अपने घर भी नहीं जा पा रहा है जो मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है.
खान ने दिप्रिंट को बताया कि पिछली बार जब वो अपने घर गया था तब उसके रिश्तेदार और परिवार वाले काफी गुस्सा हुए थे. इसका कारण यह था कि उसने भाजपा ज्वाइन कर ली है. खान ने बताया उसने अपने रिश्तेदारों को चाय के लिए पूछा तो उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने कहा, ‘कश्मीरी जख्मी है, हमें मलहम की जरुरत है.’
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छुपते फिर रहे हैं भाजपा कार्यकर्ता
फारूक उन भाजपा कार्यकर्ताओं में से है जो पंचायत चुनाव के बाद से छुप रहा है. घाटी में अनुच्छेद-370 के हटाए जाने के बाद से लोगों में गुस्सा है जिसके कारण वो भाजपा कार्यकर्ताओं से भी गुस्से में हैं. इस कारण सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता छुपे हुए हैं.
श्रीनगर के पार्टी मुख्यालयों में भी कोई नज़र नहीं आ रहा है. पार्टी दफ्तरों के बाहर सुरक्षाकर्मी घूम रहे हैं. इन जगहों पर न तो भारत का और न ही भाजपा का झंडा नज़र आ रहा है.
पंचायत चुनावों में भाजपा को फायदा हुआ लेकिन नेता छुपे हुए हैं
भाजपा जम्मू के क्षेत्र में काफी मजबूत है लेकिन वो अभी तक घाटी में अपनी मजबूत मौजूदगी नहीं दिखा पाई है. जब भाजपा ने 2015 में पीडीपी गठबंधन वाली सरकार बनाई थी तब से इस क्षेत्र में उसकी पकड़ मजबूत हुई है.
भाजपा ने राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान घाटी की 47 सीटों में से एक भी नहीं जीती थी लेकिन पंचायत चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने बहिष्कार कर दिया था. जिसके बाद भाजपा के 125 पंच और 103 पार्षद चुन के आए थे.
ये सारे नेता आतंकियों के डर से गेस्ट हाउस में रह रहे हैं. उनमें से एक का नाम मंजूर अहमद है जो बड़गाम से ‘पंच’ हैं. उसने कहा, ‘जब से मोदी जी दोबारा प्रधानमंत्री बने हैं तब से ही हम छुप कर रह रहे हैं. लेकिन अनुच्छेद-370 के हटाए जाने के बाद से डर ज्यादा बढ़ गया है.’
अहमद ने कहा, ‘वो कुछ दिन पहले अपनी बेटी को डॉक्टर से दिखाने के लिए अपने घर गया था लेकिन रास्ते में कुछ युवकों ने उसके स्कूटर को रोक दिया था.’अहमद ने दिप्रिंट से बताया, ‘अगले छह महीने तक राजनीतिक गतिविधि शुरू करना काफी मुश्किल है.’
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भाजपा फिर से वापसी करेगी
भाजपा के पार्टी दफ्तर के पास ही ठहरे हुए मोहम्मद सिद्दीक खान जो कि अल्पसंख्यक ईकाई के मुखिया भी है उन्होंने भी कहा अगले छह महीने तक राजनीतिक गतिविधि शुरू करना काफी मुश्किल है. सिद्दीक सुरक्षाकर्मियों की निगरानी वाले अनंतनाग में रह रहे हैं.
खान जब शनिवार को दाढ़ी बनाने के लिए बाहर निकले तो उन्होंने अपने पीएसओ को सिविल ड्रेस और बिना बंदूक में रहने को कहा था. खान की पत्नी की कुछ दिन पहले सर्जरी हुई थी लेकिन वो उससे मिलने सौरा नहीं जा पा रहे हैं. इन सबके बावजूद खान पूरी तरह आश्वस्त है कि पार्टी की स्थिति फिर से यहां ठीक होगी.
खान ने कहा, ‘सच्चाई का एक तमाचा हज़ारों गलतफहमियों से अच्छा है.’ अनुच्छेद-370 का समर्थन करते हुए खान ने कहा, ‘इसकी वजह से घाटी में निवेश नहीं हो पा रहा था. खान ने घाटी में 4.5 लाख भाजपा कार्यकर्ताओं के होने का दावा किया.’
पिछले हफ्ते राज्य में भाजपा के महासचिव अशोक कौल ने घाटी कै दौरा किया था. उन्होंने 50 से ज्यादा कार्यकर्ताओं, पंचों और पार्षदों से बात की. खान ने बताया, ‘कौल का एक ही संदेश था कि कुछ दिन इंतज़ार करो.’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 के हटने के बाद कहा था कि अब कश्मीर के युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ेंगे और आने दिनों में विधायक और मंत्री बनेंगे.
12 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद-370 के हटाने के बाद अपने पहले संबोधन में कहा था, ‘मैं मानता हूं कि कश्मीर के लोगों का प्रतिनिधित्व कश्मीरियों को ही करना चाहिए. हम लोग मिलकर काम करेंगे और आतंकवाद और अलगाववाद से निपटेंगे.’
मोदी ने कहा था, ‘हम सब चाहते हैं कि राज्य में जल्द से जल्द चुनाव हो और राज्य के लोगों को प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलें. मैं आश्वस्त करता हूं कि आप लोगों को जल्द ही ऐसा करने का अवसर मिलेगा. यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी जिस तरह पंचायत चुनाव कराए गए थे.’
वर्तमान में भाजपा कार्यकर्ता जिस दुर्दशा में रह रहे हैं ऐसे में लगता है कि काफी दिनों तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी.

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