बिहार में महागठबंधन लेगा सोनिया का असली इम्तिहान, दलों को साधना नहीं होगा आसान
Latest News
bookmarkBOOKMARK

बिहार में महागठबंधन लेगा सोनिया का असली इम्तिहान, दलों को साधना नहीं होगा आसान

By Jagran calender  13-Aug-2019

बिहार में महागठबंधन लेगा सोनिया का असली इम्तिहान, दलों को साधना नहीं होगा आसान

 भारतीय जनता पार्टी विरोधी दलों के लिए सियासी रूप से मुश्किल घड़ी में सोनिया गांधी ने कांग्रेस  की दोबारा कमान संभाल तो ली है, किंतु बिहार में महागठबंधन के साथी दल ही उनका असली इम्तिहान लेंगे। प्रदेश कांग्रेस के नेता उम्मीद जरूर जता रहे हैं कि सोनिया की सदारत में विपक्ष के पस्त अरमानों को संजीवनी मिल सकती है, लेकिन राष्ट्रवादी भावना के उभार के दौर में कांग्रेसियों की हसरत कितनी पूरी होगी, यह वक्त बताएगा। फिलहाल सोनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिहार में अलग-अलग पगडंडियों पर चल रहे महागठबंधन के घटक दलों को दोबारा इकट्ठा करना है।
विपक्ष में समन्‍वय व संवाद का अभाव
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार में लोकसभा चुनाव की शिकस्त ने पहले से ही विपक्ष की सियासत को अस्त-व्यस्त कर रखा है। तीन तलाक और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दों पर मिली मात ने उन्हें मुकाम के रास्ते से भी भटका दिया है। आपस में कोई समन्वय व संवाद नहीं है।
सतह पर आयी प्रदेश कांग्रेस की कलह
केंद्र सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर के शांत माहौल ने भी गठबंधन के नेताओं को बेचैन कर दिया है।  प्रदेश कांग्रेस में भी कलह खुलकर सामने आ रही है। कई नेता छोड़कर जाने के रास्ते पर हैं। पूर्व प्रदेश सचिव देवेंद्र प्रसाद सिंह ने पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह के बयान को सांप्रदायिक और देश विरोधी करार दिया है। जाहिर है, माहौल विपरीत होते देख आपस में ही तलवारें खिंचने लगी हैं। सबको एक पटरी पर लाना सोनिया के लिए इतना आसान नहीं होगा।
बिखरे कुनबे को एक करना आसान नहीं
हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा प्रमुख जीतनराम मांझी गठबंधन के अस्तित्व को नकार रहे हैं। उनके बयानों में राजद-कांग्र्रेस से बढ़ रही दूरी साफ झलक रही है। तेजस्वी यादव ने मैदान छोड़ दिया है। उनकी गतिविधियों से लगता है कि राजनीति से उन्हें ज्यादा वास्ता नहीं रह गया है। पौने तीन महीने से पटना छूट चुका है। नई दिल्ली में नया बसेरा बना लिया है। राष्‍ट्रीय जनता दल के कार्यक्रमों से भी खास मतलब नहीं रह गया है।
उम्‍मीद जगाता कौकब कादरी का बयान
ऐसे में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी का बयान विपक्ष में उम्मीद जगाती है। बकौल कादरी, सोनिया के आने से निराशा का भाव खत्म हो जाएगा। विपक्ष को संजीवनी मिल जाएगी। लालू प्रसाद के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। सबको साथ लेकर चलना बेहतर जानती हैं। लेकिन कादरी के बयान से आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि सोनिया का असर बिहार में कांग्रेस पर पड़ सकता है, किंतु गठबंधन पर कुछ खास नहीं। घटक दल अपने स्तर से काम कर रहे हैं। ऐसे में राहुल के जाने और सोनिया के आने से असर का सवाल ही बेमतलब है।

MOLITICS SURVEY

क्या आरक्षण पर मोहन भागवत के बयान से चुनावों में बीजेपी को नुकसान होगा?

TOTAL RESPONSES : 16

Raise Your Voice
Raise Your Voice 

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know