जजपा-बसपा के बाद अब नजर भाजपा-अकाली गठबंधन पर
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जजपा-बसपा के बाद अब नजर भाजपा-अकाली गठबंधन पर

By Dainiktribune calender  13-Aug-2019

जजपा-बसपा के बाद अब नजर भाजपा-अकाली गठबंधन पर

हरियाणा में जननायक जनता पार्टी (जजपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का गठबंधन होने के बाद अब सत्तारूढ़ भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच समझौते पर नजरें टिकी हैं। हालिया लोकसभा चुनाव भाजपा ने अकाली दल के साथ समझौता करके लड़ा था। विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई है। शिअद ने इस संबंध में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात का समय मांगा है। अकाली दल हरियाणा में विधानसभा की 90 में से 20 सीटों पर दावा जता रहा है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश की सिख बहुल सीटों पर उसका अच्छा प्रभाव है। शिअद के हरियाणा मामलों के प्रभारी बलविंद्र सिंह भूंदड़ के अनुसार लोकसभा चुनाव में शाह के कहने पर पार्टी ने बिना शर्त समझौता किया था। अकाली दल ने लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मांगी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह उतरने का मन बना चुकी है।
हरियाणा में गठबंधन की राजनीति दशकों से चली आ रही है। 2009 और 2014 के लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने इनेलो के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। चौटाला और बादल परिवार में राजनीतिक के साथ-साथ पारिवारिक रिश्ते भी हैं। इसके बावजूद दोनों बार विधानसभा चुनाव में अकाली दल को महज 2 ही सीटें मिलीं। 2009 में कालांवाली हलके से अकाली टिकट पर चरणजीत सिंह रोड़ी और 2014 में बलकौर सिंह ने विधानसभा चुनाव लड़ा। एसवाईएल नहर के मुद्दे पर अभय चौटाला, अकाली दल के साथ राजनीतिक समझौते को तोड़ चुके हैं। अब जजपा और बसपा के बीच गठबंधन होने के बाद प्रदेश में नए समीकरण पैदा हो गए हैं। इस समझौते के बाद भाजपा-अकाली गठबंधन में चर्चा शुरू हो गई है। इनके अलावा कांग्रेस, इनेलो, आप और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (लोसुपा) के बीच फिलहाल कोई समझौता नहीं हुआ है। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और आप के बीच बातचीत चली थी।
माना जा रहा है कि अब विधानसभा चुनाव में हरियाणा में कांग्रेस और आप के बीच समझौता हो सकता है। 2014 में भाजपा के लिए यह पहला मौका था, जब वह बिना गठबंधन के अपने बूते पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई। आमतौर पर कांग्रेस खुद के बूते सरकार बनाती रही है।
पूर्ववर्ती सरकारों और पार्टियों का रिकार्ड देखें तो चौधरी देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल सरीखे नेताओं ने गठबंधन से परहेज नहीं किया। प्रदेश का इतिहास यह भी है कि गठबंधन की सरकारों ने कभी अपना शासनकाल पूरा नहीं किया।

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