धारा 118 पर सत्‍ती का पलटवार: सत्ता से बाहर होकर कांग्रेस को याद आते हैं प्रदेश हित
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धारा 118 पर सत्‍ती का पलटवार: सत्ता से बाहर होकर कांग्रेस को याद आते हैं प्रदेश हित

By Dainik Jagran calender  12-Aug-2019

धारा 118 पर सत्‍ती का पलटवार: सत्ता से बाहर होकर कांग्रेस को याद आते हैं प्रदेश हित

सत्तारूढ़ दलों ने राज्य में देश के नामी राजनेताओं को भू-राजस्व कानून की धारा 118 की मंजूरी देकर जमीन खरीदने की छूट दी। इसमें कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका वाड्रा को शिमला के छराबड़ा में जमीन दी गई। इसी तरह से मनाली के प्रीणी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घर बनाया। इस मामले में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। यह बात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल ¨सह सत्ती ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हिमाचल बेचने की बात ऐसे करती है जैसे उसने धारा 118 को कभी छेड़ा नहीं है। इस धारा में पांच बार संशोधन कर हिमाचल के हित बेचने वाली कांग्रेस बेवजह परेशान है।
लोकसभा चुनाव हारने के बाद उसके पास कोई मुद्दा नहीं है। उसके पास कोई नेता भी नहीं है जो जनता से जुड़ा हो। डॉ. परमार जयंती से हिमाचल बचाओ अभियान शुरू करने वाली कांग्रेस को कांग्रेस बचाओ अभियान शुरू करना चाहिए। सत्ती ने कहा कि जब भी कांग्रेस विपक्ष में होती है तो हर बार धारा 118 को मुद्दा बनाया जाता है। राज्य में निवेश लाने के लिए जयराम सरकार सभी पहलुओं को देख धारा 118 की मंजूरियां दे सकती है, जो प्रदेश हित में है। हैरानी की बात है कि कांग्रेस नेता कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने को धारा-118 से जोड़ रहे हैं, जो तर्कसंगत नहीं है।
गणेश दत्त की अपनी राय सत्ती ने स्पष्ट किया कि पार्टी उपाध्यक्ष गणेश दत्त की धारा 118 में छूट देने की अपील करना व्यक्तिगत राय है। उनकी राय से पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। इतना ही नहीं पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर ¨सह बादल ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की तर्ज पर हिमाचल की धारा 118 को समाप्त करने की मांग की थी। सत्ती ने दोनों सुझाव नकार दिए। उपचुनाव में धारा118 नहीं बचा पाएगी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि धर्मशाला व पच्छाद सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस को धारा 118 का राग अलापने का भी लाभ नहीं होगा। विपक्ष उपचुनाव के लिए भूमिका तैयार कर रहा है। इससे साफ होता है कि कांग्रेस के पास न तो मुद्दा है और न ही नेतृत्व।

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