विवादों में आया नीट काउंसलिंग, राज्य में मेडिकल कॉलेजों में 705 सीटें रह गईं खाली
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विवादों में आया नीट काउंसलिंग, राज्य में मेडिकल कॉलेजों में 705 सीटें रह गईं खाली

By News18 calender  12-Aug-2019

विवादों में आया नीट काउंसलिंग, राज्य में मेडिकल कॉलेजों में 705 सीटें रह गईं खाली

राजस्थान में नीट काउंसलिंग इस साल भी विवादों में आ गया है. प्रदेश में काउंसलिंग के दोनों राउंड पूरे हाेने के बाद राज्य में करीब 705 सीटें खाली रह गईं. प्रदेश के 23 सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीटें नहीं भरी जा सकी हैं. दुखद तो यह है कि इस बार राज्य के सबसे बड़े सरकार अस्पताल सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर की भी 20 सीटें खाली रह गईं. राज्य के अलग-अलग सरकारी कॉलेजों की बात करें तो सरकारी कॉलेजों की 75 सीटें अभी भी भरे जाने के इंतजार में है. नीट की काउंसलिंग से नाराज हुए अभ्यर्थी और परिजन मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट से मिलने भी पहुंचे. वहां इन्होंने इस बारे में लिखित शिकायत भी दी.

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काउं​सलिंग सिस्टम पर उठ रहे सवाल
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पहली बार ऐसा हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में सीटें नहीं भरी जा सकी हैं. इस वजह हसे काउंसलिंग सिस्टम पर ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं. नीट की काउं​सलिंग के बाद जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने रविवार को हंगामा भी काटा. प्रदर्शनकारियों ने जयपुर की जवाहरलाल नेहरू यानि जेएलएन रोड जाम करने का प्रयास किया. प्रदर्शनकारी सड़क पर देर रात तक डटे रहे और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे.

दोनों राउंड की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है
दैनिक भाष्कर में छपी खबर के मुताबिक नीट की पहली काउंसलिंग 26 जुलाई को पूरी हुई. दूसरी काउंसलिंग एक अगस्त को हुई. पहले राउंड के बाद यह कहा गया कि जिन छात्रों ने अन्य कॉलेज में एडमिशन ले लिया है, उनकी मैंपिंग कर रहे हैं. सवाल यह है कि क्या चार दिन तक मैपिंग हुई? जाहिर सी बात है कि अगर मैपिंग हुई होती तो इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली नहीं रहती.

2018 में सिर्फ तीन सीटें ही खाली रही थीं
राज्य में यह पहला मौका है जब नीट में 705 सीटें खाली रही हैं. पिछली बार वर्ष 2018 में केवल तीन सीटें ही खाली रही थीं. नीट काउंसलिंग के बाद परिणाम आते ही राजस्थान युवा डॉक्टर्स फाउंडेशन, भीम सेना सहित अनेक मेडिकल आर्गनाइजेशन ने भी विरोध जताया. नीट के चेयरमैन डॉ. सुधीर भंडारी ने इस बारे में कहा कि राज्य सरकार की ओर से तय नियमों के अनुसार ही काउंसलिंग करा रहे हैं. हमें जो भी आपत्तियां मिल रही हैं, उन्हें उच्च स्तर पर भेजी जा रही हैं. हमारी कोशिश रहेगी कि हर समस्या का समाधान किया जाए.

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