'ईद से पहले कश्मीर के मन में चल क्या रहा है'
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'ईद से पहले कश्मीर के मन में चल क्या रहा है'

By Navbharattimes calender  09-Aug-2019

'ईद से पहले कश्मीर के मन में चल क्या रहा है'

पूर्व सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी लैला जबीन का परिवार ईद-उल-अजहा पर हर बार भेड़ों की कुर्बानी देता आया है, लेकिन इस बार वह भेड़ नहीं खरीद पा रही हैं। उधर, फारूक जान इस बात से दुखी हैं कि उनकी पत्नी का डायलिसिस छूट गया तो क्या होगा? आर्टिकल 370 पर सरकार के कदम के बाद फिलहाल जम्मू-कश्मीर में लोगों की जिंदगी उनके मकान में कैद सी हो गई है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। बाजार से रौनक गायब है। त्योहार नजदीक है, लेकिन उसकी तैयारियों की जगह संशय के बहुत सारे सवाल लोगों के जेहन में हैं। यहां के लोगों को अब तक नहीं पता है कि वह ईद-उल-अजहा का त्योहार हमेशा की तरह मना पाएंगे या नहीं। 
300 बेड के एसएमएचएस अस्पताल के एक डॉक्टर कहते हैं, 'मेरे मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा होगा यह सोचकर मैं रोजाना इस आभासी कर्फ्यू के बीच अस्पताल जरूर जाता हूं। मैं सोचता हूं कि अगर मैं अस्पताल नहीं जाऊंगा तो मेरे मरीजों का क्या होगा? जम्मू- कश्मीर के लोगों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था।' 
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'ऐसी जिंदगी कौन जीना चाहता है?' 
फारूक की पत्नी को हर कुछ दिन पर डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में फारूक ने कहा, 'डेप्युटी कमिश्नर कार्यालय से दो कर्फ्यू पास तो मुझे मिल गए हैं। ऐसे में मैं अपनी पत्नी को अस्पताल तक ले जा सकता हूं। पर, इससे मन की शांति नहीं मिलती। डेप्युटी कमिश्नर कार्यालय के कर्मचारी अच्छे हैं, जिन्होंने मेरी मदद की, लेकिन बताइए कौन ऐसी जिंदगी जीना चाहता है?' 
'अभी बेहतर होने के संकेत नहीं' 
श्रीनगर से सटे सोलिना के रहने वाले मंजोर अहमद कहते हैं, 'ईद-उल-अजहा का त्योहार करीब है। पर, अभी तक स्थितियों के बेहतर होने का कोई संकेत नहीं है। यह ठीक ऐसा है कि जैसे जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इस साल त्योहार मनाने में सक्षम नहीं होने के लिए खुद को समेट लिया है।' 

'इस बार स्थितियां कुछ और' 
उधर, लैला के परिवार में इस त्योहार पर हर बार एक जोड़ी भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है। पर, इस बार उन्हें इस बात का दुख है कि शायद वह अपनी परंपरा ना निभा पाएं। लैला कहती हैं, 'इस बार हम अपने धार्मिक दायित्व को पूरा करने में सक्षम होते नहीं दिख रहे हैं। कश्मीरियों को लंबे समय से अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वर्तमान स्थिति कुछ और है।' 
सबकुछ अभी ठीक नहीं है घाटी में 
एक तरफ प्रशासन यह दावा जरूर कर रहा है कि जम्मू- कश्मीर में चीजें पहले से बेहतर हो रही हैं और स्थिति नियंत्रण में है। पर, यहां के लोगों का दर्द यह बता रहा है कि अभी सबकुछ बेहतर नहीं हुआ है। मीडियाकर्मियों के लिए भी फिलहाल यहां स्थिति मुश्किल ही है। दक्षिण भारत के एक अखबार के लिए काम कर रहे एक पत्रकार ने बताया, 'मुझे खुद कर्फ्यू पास उपलब्ध नहीं कराया गया। जब मैंने इस बारे में पूछताछ की तो साफ कहा गया कि उन्हें ऊपर से निर्देश है कि किसी भी मीडियाकर्मी को यह पास उपलब्ध ना कराएं।' 

डोभाल ने दिए ये निर्देश 
उधर, मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित 400 से अधिक लोग विभिन्न स्थानों पर पुलिस हिरासत में हैं। इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने जरूर जम्मू कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि राज्य में लागू मौजूदा कड़े प्रतिबंधों के दौरान आम लोगों को किसी भी हालत में कोई परेशानी न हो। उधर, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव ने सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से काम पर वापस लौटने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सांबा जिले में शुक्रवार (9 अगस्त) से सभी स्कूल पहले की तरह खुलेंगे। 
 

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