मिशन 65: झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का ये है मास्टर प्लान, इन 38 सीटों पर खास नजर
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मिशन 65: झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का ये है मास्टर प्लान, इन 38 सीटों पर खास नजर

By India18 calender  06-Aug-2019

मिशन 65: झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का ये है मास्टर प्लान, इन 38 सीटों पर खास नजर

झारखंड में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 65 से अधिक सीटें जीतने का टारगेट रखा है. इसको लेकर पार्टी ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है. इस प्लान पर पहल जारी है. इसके तहत उन सीटों के लिए खास रणनीति बनाई गई है, जिन पर 2014 में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था. 2014 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी को सूबे में मात्र 37 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था.

झारखंड में 'अबकी बार, 65 पार का नारा' भाजपा दिन-रात जप रही है. पार्टी को लगता है कि झारखंड में इस लक्ष्य को पाया जा सकता है. आधार कुछ जमीन पर हैं, तो कुछ भाजपा नेताओं के तसव्वुर में. संगठन आज नहीं, पिछले दो सालों से इसकी तैयारी में जुटा है. इसके लिए व्यापक मास्टर प्लान तैयार है.

क्या है बीजेपी का मास्टर प्लान

1. 28 ST सीटों में से 22 सीटों पर कब्जा करना, इसके लिए आदिवासी समाज को प्रेरित करना

2. जिन सीटों पर पिछली बार दूसरे स्थान पर थे, उनके सामाजिक समीकरण को पक्ष में करना
3. दूसरे दल के विधायकों को भाजपा में लाने का प्रयास करना
4. क्षेत्रीय स्तर पर प्रमुख सामाजिक संगठन के नेताओं को पार्टी से जोड़ना
5. जातिगत गोलबंदी अगर है, तो उसे तोड़ने का प्रयास करना
6. कमजोर स्थानों पर विशेष नजर, बूथ कमिटी में 25 लोगों को रखना
7. पन्ना प्रमुख की सूची बनाना या बनी सूची का विस्तार करना
8. केंद्र व राज्य सरकार की योजना के लाभुकों के साथ संपर्क बनाना

झारखंड में 29513 बूथ हैं. इन पर कमिटी बनाना, बीजेपी के मास्टर प्लान का बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस पर काफी काम हुआ है और हो भी रहा है.

राज्य सरकार के मंत्री सीपी सिंह कहते हैं कि 65 पार का लक्ष्य पाने के लिए कई स्तर पर काम करने के लिए रणनीतियां बनाई गई हैं. केंद्रीय नेताओं का सबसे अधिक फोकस सदस्यता अभियान पर है. पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी जिन सीटों पर दूसरे स्थान पर रही, उन पर खास ध्यान दिया जा रहा है.

2014 में इन सीटों पर पार्टी रही दूसरे स्थान पर

बहड़ागोड़ा, बरहेट, बरही, बड़कागांव, भवनाथपुर, बिशुनपुर, चाईबासा, चक्रधरपुर, डाल्टनगंज, धनवार, डुमरी, गोमिया, हुसैनाबाद, जगरनाथपुर, जरमुंडी, खरसावां, कोलेबिरा, लातेहार, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, मझगांव, मांडू, मनोहरपुर, नाला, निरसा, पाकुड़, पांकी, पोड़ैयाहाट, सराईकेला, शिकारीपाड़ा.

2014 में इन सीटों पर तीसरे स्थान पर रही पार्टी
डाल्टनगंज, धनवार, गोमिया (2018 उपचुनाव में तीसरे स्थान पर ), हुसैनाबाद ,जरमुंडी, मझगांव, पाकुड़, शिकारीपाड़ा.

तीसरे स्थान वाली सीटों पर भाजपा की रणनीति यहां के लिए दूसरे दलों के विधायक को पार्टी में लाना है. सामाजिक समीकरण को साधना और क्षेत्र के जातीय प्रभाव वाले नेताओं या सदस्यों को पार्टी से जोड़ना है. इससे इन सीटों पर जातीय समीकरण को अपने पक्ष में किया जा सकेगा.

पार्टी के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश कहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज के प्रभाव के अलावा पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लगातार क्षेत्र में संगठन को मजबूत कर रहे हैं. इससे जीत का स्वाद चखने का मौका मिलेगा. विपक्षी दलों की आपसी कलह का लाभ भी मिलेगा. जनता सब देख रही है.

...तो इसलिए सदस्यता अभियान पर जोर  

झारखंड में भाजपा 2014 में मोदी लहर के बावजूद 37 सीटें ही जीत पाई थीं. सहयोगी आजसू को 5 सीटें मिली थीं. बीजेपी को उस चुनाव में 31.3 प्रतिशत वोट मिला था. पार्टी इस बार के चुनाव में अपना वोट प्रतिशत बढ़ाना चाहती है. इसे 50 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है. इसके लिए 25 लाख नये सदस्य बनाने का लक्ष्य हर हाल में पूरा करने पर जोर है. पार्टी को लगता है कि 25 लाख नये सदस्य बन गये, तो साल अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में 65 पार का लक्ष्य भी हासिल हो जाएगा. साथ ही वोट परसेंटेज भी बढ़ जाएगा.

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