जम्मू-कश्मीर पर केन्द्र का फैसला संघीय ढांचे पर प्रहार- हेमंत सोरेन
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जम्मू-कश्मीर पर केन्द्र का फैसला संघीय ढांचे पर प्रहार- हेमंत सोरेन

By India18 calender  06-Aug-2019

जम्मू-कश्मीर पर केन्द्र का फैसला संघीय ढांचे पर प्रहार- हेमंत सोरेन

जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय कई कारणों से कानूनी जांच में सफल नहीं होगा. आगे सर्वोच्च न्यायालय इस निर्णय को निरस्त कर दें, तो बड़ी बात नहीं होगी. ये सबकुछ सियासी लाभ और नाटक के लिए किये गये हैं.

यह संघीय ढांचे पर प्रहार 

पूर्व सीएम ने कहा कि आज वहां विधानसभा भंग है. बेहतर होता कि विधानसभा चुनाव करा लिये जाते. आवाम की भी बातों को सुना जाता. उसके बाद विधि सम्मत कार्रवाई की जाती. ये संघीय ढांचे पर प्रहार जैसा है. देश संविधान से चलेगा या दादागीरी से नहीं.

मंत्रियों ने किया स्वागत

वहीं केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि अब एक देश, एक विधान और एक निशान होगा. झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय ने कहा कि यह विलम्ब से लिया गया, मगर जरूरी कदम है. पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर को भी साथ लाने का प्रयास केन्द्र सरकार करेगी. मंत्री निलकंठ सिंह मुंडा ने इसे मोदी सरकार का साहसिक कदम बताया.

विधानसभा चुनाव को देखते हुए फैसला 
झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि सबका साथ और सबका विकास का दावा फेल हो गया है. आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है. सरकार को इस पर सबको विश्वास में लेना चाहिए. कांग्रेस ने देश को बनाया, जबकि बीजेपी तोड़ने का काम कर रही है.

रांची में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र-छात्राओं ने भी इस पर खुशी जताई. रांची विश्वविद्यालय परिसर के पास सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी. धनबाद की जनता ने भी फैसले का स्वागत किया है.

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A हटा

जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर सरकार का संकल्प पत्र पेश किया. अमित शाह ने कहा कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटा दिया गया है. अब इसके सभी खंड लागू नहीं होंगे. गृहमंत्री ने इसके साथ ही आर्टिकल 35A हटाए जाने का भी ऐलान किया.

अमित शाह ने सदन में कश्मीर के पुनर्गठन प्रस्ताव भी पेश किया. उनके ऐलान के बाद विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने उन्हें इस तरह के किसी बिल की पहले जानकारी नहीं दी थी.

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