15 अगस्त तक मिलेगा कांग्रेस को नया अध्यक्ष?
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15 अगस्त तक मिलेगा कांग्रेस को नया अध्यक्ष?

By Satyahindi calender  03-Aug-2019

15 अगस्त तक मिलेगा कांग्रेस को नया अध्यक्ष?

कांग्रेस में पिछले 2 महीने से अध्यक्ष पद को लेकर बनी असमंजस की स्थिति स्वतंत्रता दिवस से पहले ख़त्म हो सकती है। यानी 15 अगस्त से पहले कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल सकता है। नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक संसद के मौजूदा सत्र के फ़ौरन बाद बुलाई जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक़ राहुल गाँधी भी इस बैठक में शामिल होंगे। अभी तक इस बैठक की तारीख़ तय नहीं हुई है। जल्द ही तारीख़ तय होने के आसार हैं।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘कांग्रेस कार्य समिति का एजेंडा क्या होगा, मैं नहीं बता सकता क्योंकि अभी एजेंडा तय नहीं हुआ है। कार्य समिति की बैठक इस संसद सत्र के बाद होगी। जब भी कोई तारीख़ तय होगी, आपको सूचित किया जाएगा।' बता दें कि संसद का मौजूदा सत्र सात अगस्त को ख़त्म हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों के भीतर कार्यसमिति की बैठक की तारीख़ के बारे में फ़ैसला हो सकता है। माना जा रहा है कि कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर कोई फ़ैसला हो सकता है।
कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने कहा कि महासचिवों और प्रभारियों की बैठक के दौरान संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने यह प्रस्ताव दिया कि संसद सत्र के बाद कार्य समिति की बैठक बुलाई जाए। बता दें कि नए अध्यक्ष चुनने की कवायद में के.सी. वेणुगोपाल ने सभी महासचिव और प्रभारियों से बंद लिफाफे में नए अध्यक्ष के लिए चार-चार नाम माँगे थे। समझा जाता है कि सभी महासचिवों और प्रभारियों ने संगठन मंत्री, संगठन महासचिव को इन नामों वाले अपने-अपने लिफाफे सौंप दिए हैं। कार्यसमिति की बैठक में इन्हीं नामों चर्चा करके किसी एक को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना जा सकता है।
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में क़रारी हार के बाद से ही कांग्रेस के अंदर उठापटक का दौर जारी है। 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद 25 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश की थी। उसके बाद कई दिनों तक राहुल के मान मनौव्वल का दौर चला। बाद में उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मिलकर नया अध्यक्ष चुनें और यह अध्यक्ष उनके परिवार से नहीं होना चाहिए, न तो उनकी माँ सोनिया गाँधी और न ही उनकी बहन प्रियंका गाँधी।
राहुल के बाद हुए कई इस्तीफ़े
राहुल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को नया अध्यक्ष चुनने के लिए महीने भर की मोहलत दी थी। जब पार्टी नेता एक महीने बाद भी नया अध्यक्ष चुनने में नाकाम रहे तो 3 जुलाई को राहुल ने 4 पेज की चिट्ठी के रूप में अपना इस्तीफ़ा लिख कर उसे ट्विटर पर पोस्ट कर दिया था। राहुल ने इस बात पर ख़ासी नाराज़गी जताई थी कि पार्टी नेताओं ने नए अध्यक्ष चुनने के लिए महीने भर से ज़्यादा का वक़्त बर्बाद कर दिया। उन्हें बहुत पहले ही नया अध्यक्ष चुन लेना चाहिए था। इसके बाद एक और महीना बीत जाने के बाद भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नया अध्यक्ष नहीं चुन पाए हैं। पार्टी में कोई अध्यक्ष भी नहीं बनना चाहता है। इस बीच पार्टी में काफ़ी उठापटक सामने आई।
इस बीच राहुल गाँधी के सार्वजनिक रूप से इस्तीफ़े के बाद तीन महासचिव दीपक बावरिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया और हरीश रावत ने भी इस्तीफ़ा दे दिया था। इनके अलावा मुंबई प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। कई अन्य नेताओं ने भी अपना पद छोड़ दिया है।
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पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा, इस बात को लेकर अभी तसवीर साफ़ नहीं है। क्योंकि इससे पहले कई नेताओं के नाम अध्यक्ष के रूप में तय बताए जा चुके हैं। अशोक गहलोत, सुशील कुमार शिंदे, ए.के. एंटोनी और मल्लिकार्जुन खड़गे को अध्यक्ष बनाने की बात चली थी, लेकिन दोनों ने ही यह ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था।
बाद में प्रियंका का नाम भी चला। पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह खुलकर प्रियंका के बारे में बयान दे चुके हैं। कैप्टन ने प्रियंका का नाम लिए बगैर पार्टी की कमान किसी युवा नेता को देने की माँग की थी। लेकिन यह ग़ुब्बारा भी उस वक़्त फुस्स हो गया जब प्रियंका ने यह ज़िम्मेदारी लेने से साफ़ इनकार कर दिया।
बता दें कि पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह बाक़ायदा बयान जारी करके कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर नए अध्यक्ष का चुनाव करने की माँग कर चुके हैं। उनके बाद कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता और लंबे समय तक महासचिव रहे जनार्दन द्विवेदी ने भी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाने की माँग की थी। 
कई वरिष्ठ नेताओं की माँग के बावजूद कार्यसमिति की बैठक नहीं बुलाई गई। नेताओं की नाराज़गी को देखते हुए संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सभी महासचिवों और प्रभारियों को चिट्ठी लिखकर अध्यक्ष पद के लिए अपनी पसंद के 4 नाम देने को कहा था। इसके बाद नए अध्यक्ष को लेकर चल रही कवायद थम गई थी। अब ऐसा लगता है कि इसी फ़ॉर्मूले से संसद सत्र के फ़ौरन बाद होने वाली कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव होगा।

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