पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, सिद्धू, बादल, मजीठिया व खैहरा नहीं पहुंचे
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पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, सिद्धू, बादल, मजीठिया व खैहरा नहीं पहुंचे

By Jagran calender  02-Aug-2019

पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, सिद्धू, बादल, मजीठिया व खैहरा नहीं पहुंचे

पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो गया है। तीन दिन का सत्र भले ही प्रारूप में छोटा हो, लेकिन विपक्ष अपना पूरा दम दिखाने के लिए तैयार है। विपक्ष के निशाने पर मुख्य रूप से जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा होंगे। जेल मंत्री के जरिये ही विपक्ष ड्रग्स और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेर सकता है। सत्र के पहले दिन सबकी निगाहें मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके नवजोत सिंह सिद्धू को ढूंढ रही थी, लेकिन वह नहीं पहुंचे। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजिठिया, सुखपाल खैहरा भी अनुपस्थित रहे। पहले दिन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई। 
सदन नेे दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित 18 दिवंगत आत्माओंं को श्रद्धांजलि दी। सदन ने राज्य सभा के पूर्व सदस्य वरिंदर सिंह कटारिया, किकर सिंह, हमीर सिंह, चौधरी नंद लाल, कामरेड बलवंत सिंह, स्नेह लता, परमजीत सिंह, करनैल सिंह, गुरमेज सिंह, कुलवंत सिंह, ईशर सिंह, उजागर सिंह, जंगीर सिंह, सांता सिंह, बाबा लाभ सिंह, सुनाम ने बोरवेल में गिरेे फतेहवीर और लखवीर सिंह को श्रद्धांजलि दी। फतेहवीर का नाम परमिंदर सिंह ढींडसा, अमन अरोड़ा और सिमरजीत सिंह बैंस केे कहने पर शामिल किया गया। 
 
वहीं, विधानसभा में विपक्ष की रणनीति से कांग्रेस सचेत है। कांग्रेस भी मान रही है कि विपक्ष जेल के मुद्दे पर हावी होने की कोशिश कर सकता है। कांग्रेस के लिए राहत वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी बिखरी हुई है और अकाली दल और भाजपा का संख्याबल कम हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष के लिए विपक्ष ज्यादा परेशानी नहीं खड़ा कर सकता।
विधानसभा के छोटे सत्र को बढ़ाने को लेकर आम आदमी पार्टी और अकाली दल पहले ही स्पीकर राणा केपी को अपना मांग पत्र सौंप चुके हैैं। विपक्ष भलीभांति जानता है कि सरकार किसी भी सूरत में सत्र का समय नहीं बढ़ाएगी। ऐसे में विपक्ष ने तय समय में ही सरकार को घेरने का फैसला किया हुआ है। विपक्ष ड्रग्स, कानून व्यवस्था और जेलों में हुई घटनाओं को विशेष तवज्जो दे रहा है।
विपक्ष का मानना है कि अकेले जेल की घटनाओं का मुद्दा उठाने से ड्रग्स और कानून व्यवस्था के तार आपस में जुड़ जाएंगे। नाभा जेल में डेरा प्रेमी की मौत, उसके बाद बेअदबी कांड में सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट, अमृतसर में 584 किलो हेरोइन मामले में पकड़े गए नमक कारोबारी गुरपिंदर सिंह की मौत मामला और लुधियाना जेल में कैदियों का हंगामा सभी एक साथ जुड़े हुए मामले हैं। जिसमें सरकार की विफलता खुल कर सामने आई थी। इन मामलों को लेकर अकाली दल और आप पहले ही जेल मंत्री पर आक्रामक रहे थे।
अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने तो सुखजिंदर रंधावा के इस्तीफे के अलावा उनके खिलाफ कार्रवाई तक की मांग की थी। ऐसे में विपक्ष के निशाने पर रंधावा का आना तय माना जा रहा है जो सरकार के लिए परेशानी भी खड़ी कर सकता है।

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