आजतक की शर्मनाक पत्रकारिता, उन्नाव की ‘बेटी’ पर शो लेकिन BJP का नाम नहीं
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आजतक की शर्मनाक पत्रकारिता, उन्नाव की ‘बेटी’ पर शो लेकिन BJP का नाम नहीं

By Boltahindustan calender  30-Jul-2019

आजतक की शर्मनाक पत्रकारिता, उन्नाव की ‘बेटी’ पर शो लेकिन BJP का नाम नहीं

उन्नाव की जिस लड़की ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई अतुल सिंह पर गैंगरेप का आरोप लगया था, वह इस वक़्त अस्पताल में ज़िंदगी और मौत की जंग की लड़ रही है। दरअसल, रविवार दोपहर एक संदिग्ध ट्रक ने पीड़िता की कार को टक्कर मार दी थी, जिसमें उसके दो परिजनों की मौत हो गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
इस हादसे के बाद किसी बड़ी साज़िश की आशंका जताई गई। पीड़िता के परिजनों से लेकर विपक्षी दल के नेताओं तक ने ये दावा किया कि यह हादसा नहीं बल्कि साज़िश है। पीड़िता की बहन और मां ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि इस घटना को किसी और ने नहीं बल्कि ख़ुद बीजेपी विधायक के आदमियों ने अंजाम दिया है।
जिसके बाद बीजेपी विधायक पर सवाल उठने लगे और फिर परिजनों की शिकायत पर बीजेपी विधायक और उसके भाई के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई। ये मामला सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड करने लगा। लेकिन इस मामले में भी मेनस्ट्रीम मीडिया की भूमिका बिल्कुल वैसी ही दिखी, जैसी किसी मामले में बीजेपी के किसी नेता के फंसने के बाद रहती है। यानी मेनस्ट्रीम मीडिया में इस मामले में भी ख़ामोशी देखने को मिली।
हालांकि ऐसा भी नहीं है कि सभी चैनलों ने इस मामले पर चुप्पी साधी। कुछ चैनलों ने इस ख़बर को प्रमुखता से दिखाया भी। लेकिन इसमें भी चैनलों का खेल देखने को मिला। ऐसे ही एक चैनल ‘आजतक’ की बात करें तो उसके प्राइम शो ‘दंगल’ में इस ख़बर को जगह दी गई। इसपर ज़ोरदार बहस भी हुई। लेकिन चैनल ने बड़ी ही चालाकी के साथ आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर के साथ जुड़े बीजेपी के नाम को छुपा लिया।
चैनल के शो के पोस्टर में लिखा गया, “सेंगर के ‘कोतवाल’ तो डर काहे का?” इस पोस्टर में सेंगर को बीजेपी विधायक नहीं लिखा गया। ये नहीं बताया गया कि वह गैंगरेप के केस में पिछले एक साल से जेल में हैं, इसके बावजूद बीजेपी ने उनसे अपना नाता नहीं तोड़ा है। वह गैंगरेप के आरोपी होने के बावजूद बीजेपी के विधायक बने हुए हैं।
चैनल ने ‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वाली सत्तारूढ़ बीजेपी से यह नहीं पूछा कि आख़िर सेंगर को अभी तक पार्टी से क्यों नहीं निकाला गया? ये सवाल ऐसे हैं कि जो इस मामले में चैनल द्वारा ज़रूर पूछे जाने चाहिए थे, लेकिन चैनल ने ऐसा नहीं किया। ऐसे में चैनल की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना लाज़मी है।

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