मनोज तिवारी की केजरीवाल को चिट्ठी, लिखा- महिलाओं के लिए रजिस्ट्री शुल्क करें माफ
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मनोज तिवारी की केजरीवाल को चिट्ठी, लिखा- महिलाओं के लिए रजिस्ट्री शुल्क करें माफ

By Aaj Tak calender  28-Jul-2019

मनोज तिवारी की केजरीवाल को चिट्ठी, लिखा- महिलाओं के लिए रजिस्ट्री शुल्क करें माफ

जैसे-जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं वैसे-वैसे केजरीवाल और बीजेपी के बीच जनता की सबसे बड़ी हितैषी कौन है, इसे लेकर होड़ शुरू हो चुकी है. एक ओर जहां आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों को पक्का करने का ऐलान किया, तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार को श्रेय दे रही है. साथ ही केजरीवाल पर इसे लेकर झूठ बोलने का आरोप लगा रही है. केजरीवाल सरकार मेट्रो में फ्री में महिलाओं को सफर कराने का वादा कर रही है.
बीजेपी पक्का कॉलोनियों के बहाने केजरीवाल सरकार से मांग कर रही है कि रजिस्ट्री में महिलाओं को छूट दी जाए. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर महिलाओं को 4 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की मांग की है, जिसमें तर्क ये दिया गया है इससे महिला सशक्तिकरण बढ़ेगा और महिलाओं के नाम संपत्ति होने से उनकी समाजिक सुरक्षा भी बढ़ेगी.
इसके लिए मनोज तिवारी ने बीजेपी शासित राज्य झारखंड का भी हवाला दिया है. बता दें कि झारखंड सरकार जून, 2017 से महिलाओं के नाम संपत्ति की 1 रुपये शुल्क में रजिस्ट्री कर रही है. अभी तक सवा लाख महिलाओं के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है. अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया को तेज करने की मांग करने के लिए मनोज तिवारी ने केजरीवाल से मांग की है.

 
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली सरकार पर अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण पर रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया है. तिवारी ने कहा, '2014 में मोदी सरकार बनने के बाद ही 1797 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और शहरी विकास मंत्रालय इस संबंध में पत्र लिखकर बार-बार अवगत कराता रहा है, लेकिन दिल्ली सरकार ने अपनी ओर से अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई.'
मनोज तिवारी ने कहा, 'इसके बाद शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने उपराज्यपाल के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया जिसने तीन माह में कॉलोनियों के नियमितिकरण के पक्ष में अपनी रिपोर्ट दे दी, जिसके कारण नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई. दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण में सहयोग करने के बजाय रोड़ा अटकाती रही है, लेकिन अब जब कॉलोनियां पास हो रही हैं तो उसका श्रेय लेने की कोशिश आपकी तरफ से की जा रही है जो पूरी तरह गलत है.'

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