फागू चौहान का घोसी विधानसभा से इस्तीफा, अब नहीं लड़ेंगे कोई चुनाव
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फागू चौहान का घोसी विधानसभा से इस्तीफा, अब नहीं लड़ेंगे कोई चुनाव

By Jagran calender  27-Jul-2019

फागू चौहान का घोसी विधानसभा से इस्तीफा, अब नहीं लड़ेंगे कोई चुनाव

 मऊ जिले की घोसी विधानसभा से लगातार आठ बार विधायक भाजपा नेता फागू चौहान ने शुक्रवार को अपना त्यागपत्र दे दिया। बिहार के राज्यपाल नियुक्त होने के बाद भाजपा के इस कद्दावर नेता ने विधायकी को छोड़ दिया है।
बिहार के नव नियुक्त राज्यपाल फागू चौहान ने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित को सौंपा। इसके साथ ही भविष्य में कोई चुनाव न लडऩे की घोषणा भी की। उनको नया पदभार मिलने पर सदन में सर्वसम्मत बधाई प्रस्ताव पारित कर चौहान को भावभीनी विदाई दी गयी। फागू चौहान ने विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारयण दीक्षित से उनके कक्ष में शिष्टाचार भेंट की। अस्वस्थ होने के बाद भी दीक्षित कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने शाल व प्रतीक चिन्ह भेंट कर चौहान का स्वागत किया और अपनी पुस्तकें 'हिन्द स्वराज्य का पुनर्पाठ' व 'मधु अभिलाषा' भेंट की।
चौहान ने अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र भी सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इससे पहले नव नियुक्त राज्यपाल फागू चौहान विधानसभा मंडप में पहुंचे जहां कार्यवाही चल रही थी। इस दौरान वहां उनका दलगत राजनीति से हट कर करतल ध्वनि से स्वागत किया गया। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने उनके सम्मान में बधाई प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जिसका सपा दल उप नेता इकबाल महमूद, बसपा के लालजी वर्मा व कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू के अलावा अपना दल व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भी समर्थन किया। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अधिष्ठाता के रूप में सदन का संचालन कर रहे सुखदेव राजभर ने चौहान को विनम्र स्वभाव, ईमानदार व स्वच्छ छवि वाला राजनेता बताया।
सदन में शानदार विदाई से अभिभूत फागू चौहान ने कहा कि उनके लिए यह ऐसी घड़ी है, जब उनको हर्ष के साथ दुख का भी अहसास हो रहा है। एक ओर जहां राज्यपाल नामित होने का सुखद अहसास है तो वषरे साथ रहे साथियों से अलग होने का दुख भी हो रहा है। भावुक हुए चौहान ने कहा कि वह बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पुरखों ने सोचा नहीं होगा कि कभी ऐसा समय भी आएगा। फागू चौहान का कहना था कि राजभवन पहुंचने का उन्हें कभी सपना भी न आया। पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए उन्होंने रामनाथ कोङ्क्षवद के राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का जिक्र भी किया। उनका कहना था कि अब वह 71 वर्ष के है और पांच वर्ष राज्यपाल बने रहेंगे तो चुनाव लडऩे का औचित्य नहीं रह जाएगा।

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