इस अधिकारी की रिपोर्ट पर हुई होती कार्रवाई तो नहीं होता सोनभद्र हत्याकांड
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इस अधिकारी की रिपोर्ट पर हुई होती कार्रवाई तो नहीं होता सोनभद्र हत्याकांड

By Aaj Tak calender  27-Jul-2019

इस अधिकारी की रिपोर्ट पर हुई होती कार्रवाई तो नहीं होता सोनभद्र हत्याकांड

उत्तर प्रदेश में दिल दहला देने वाले सोनभद्र नरसंहार मे एक नया खुलासा हुआ है. इस खुलासे ने उस खेल को उजागर किया है, जिससे पता चलता है कि सोनभद्र में पिछले कई सालों से जमीन का खेल चल रहा था लेकिन सरकार सब कुछ जानकर भी चुप बैठी हुई थी.
जानकारी के मुताबिक तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने साल 2014 में भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि किस तरह 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अपर अधिकारियों, नेताओं और दबंगों ने सुनियोजित ढंग से कब्जा जमा लिया है.
रिपोर्ट में कहा गया था कि इस भूमि की कीमत 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है. इस बीच समाजवादी पार्टी की सरकार से लेकर योगी सरकार किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की. जानकारी के मुताबिक इस रिपोर्ट में एक-एक अधिकारी और नेताओं के कारनामों का जिक्र था. लिहाजा अगर इस पर ठीक से जांच होती है तो कई लोग इसमे फंस सकते हैं.
तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने रिपोर्ट पत्रांक संख्या 401/11-बी-6 दिनांक 29 मार्च, 2014 को शासन को भेजी थी. एके जैन साल 2014 में सोनभद्र में मुख्य वन संरक्षक के तौर पर तैनात थे. इस दौरान उन्होंने जिले में वन विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जों की ये पूरी रिपोर्ट तैयार की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक जिले की करीब 1 हजार हेक्टेयर जमीन पर भू-माफिया का कब्जा था.
इस रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के अधिकारी और शासन स्तर पर बैठे नौकरशाह भी इस घोटाले में शामिल हैं. उन्होंने अपने रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया था कि वन भूमि को गैर वन भूमि में बदलना वन संरक्षण अधिनियम की अनदेखी और गैरकानूनी है. रिपोर्ट में कहा गया था कि यह जमीन आदिवासियों की है. वो इस पर पुश्तैनी खेती करते हैं और इस जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास है. लेकिन कुछ नौकरशाहों ने इन जमीनों को निजी हाथों में सौंप दिया है.
उत्तर प्रदेश में दिल दहला देने वाले सोनभद्र नरसंहार मे एक नया खुलासा हुआ है. इस खुलासे ने उस खेल को उजागर किया है, जिससे पता चलता है कि सोनभद्र में पिछले कई सालों से जमीन का खेल चल रहा था लेकिन सरकार सब कुछ जानकर भी चुप बैठी हुई थी.
जानकारी के मुताबिक तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने साल 2014 में भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि किस तरह 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अपर अधिकारियों, नेताओं और दबंगों ने सुनियोजित ढंग से कब्जा जमा लिया है.
रिपोर्ट में कहा गया था कि इस भूमि की कीमत 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है. इस बीच समाजवादी पार्टी की सरकार से लेकर योगी सरकार किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की. जानकारी के मुताबिक इस रिपोर्ट में एक-एक अधिकारी और नेताओं के कारनामों का जिक्र था. लिहाजा अगर इस पर ठीक से जांच होती है तो कई लोग इसमे फंस सकते हैं.
तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने रिपोर्ट पत्रांक संख्या 401/11-बी-6 दिनांक 29 मार्च, 2014 को शासन को भेजी थी. एके जैन साल 2014 में सोनभद्र में मुख्य वन संरक्षक के तौर पर तैनात थे. इस दौरान उन्होंने जिले में वन विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जों की ये पूरी रिपोर्ट तैयार की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक जिले की करीब 1 हजार हेक्टेयर जमीन पर भू-माफिया का कब्जा था.
इस रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के अधिकारी और शासन स्तर पर बैठे नौकरशाह भी इस घोटाले में शामिल हैं. उन्होंने अपने रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया था कि वन भूमि को गैर वन भूमि में बदलना वन संरक्षण अधिनियम की अनदेखी और गैरकानूनी है. रिपोर्ट में कहा गया था कि यह जमीन आदिवासियों की है. वो इस पर पुश्तैनी खेती करते हैं और इस जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास है. लेकिन कुछ नौकरशाहों ने इन जमीनों को निजी हाथों में सौंप दिया है.
जैन ने अपनी रिपोर्ट की एक कॉपी केंद्र सरकार को भी भेजी थी जिस पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई कर बताने का निर्देश दिया था. लेकिन केंद्र के पत्र को अधिकारियों ने कोई तवज्जो नहीं दी, बल्कि इस रिपोर्ट के बाद जैन का डिमोशन कर उन्हें आगरा मंडल मे भेज दिया गया था.
पिछले साल 11 जुलाई, 2018 को उनकी सड़क दुर्घटना में संदिग्ध मौत हो गई थी. अब जबकि इस मामले मे सरकार की बहुत किरकिरी हो चुकी है तो सरकार इस रिपोर्ट को फिर से खंगाल रही है जिससे कि पूरे मामले से पर्दा उठ सके. सोनभद्र दौरे से वापस लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है.
जैन ने अपनी रिपोर्ट की एक कॉपी केंद्र सरकार को भी भेजी थी जिस पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई कर बताने का निर्देश दिया था. लेकिन केंद्र के पत्र को अधिकारियों ने कोई तवज्जो नहीं दी, बल्कि इस रिपोर्ट के बाद जैन का डिमोशन कर उन्हें आगरा मंडल मे भेज दिया गया था.
पिछले साल 11 जुलाई, 2018 को उनकी सड़क दुर्घटना में संदिग्ध मौत हो गई थी. अब जबकि इस मामले मे सरकार की बहुत किरकिरी हो चुकी है तो सरकार इस रिपोर्ट को फिर से खंगाल रही है जिससे कि पूरे मामले से पर्दा उठ सके. सोनभद्र दौरे से वापस लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है.

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