विपक्ष के विरोध के बीच लोस में श्रमिक कल्याण संबंधी दो विधेयक पेश
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विपक्ष के विरोध के बीच लोस में श्रमिक कल्याण संबंधी दो विधेयक पेश

By Navbharattimes calender  23-Jul-2019

विपक्ष के विरोध के बीच लोस में श्रमिक कल्याण संबंधी दो विधेयक पेश

विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में मजदूरी संहिता 2019 और उत्तरजीविका जन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2019 संबंधी विधेयक पेश किया । निचले सदन में श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने इन दोनों विषयों पर विधेयक पेश किये । हालांकि, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरएसपी सहित कुछ विपक्षी दलों ने इन्हें पेश करने का विरोध किया और सरकार से इन्हें संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की । मंगलवार को जब अध्यक्ष ओम बिरला ने मंत्री को विधेयक पेश करने को कहा तब विपक्षी सदस्यों ने इसे स्थायी समिति को भेजने की मांग करते हुए विरोध किया । मजदूरी संहिता 2019 संबंधी विधेयक को पेश करने का विरोध करते हुए आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस विधेयक पर त्रिपक्षीय चर्चा हुई लेकिन मजदूरी, सुरक्षा जैसे विषयों पर सहमति नहीं बनी । तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि इस संहिता में कई कानूनों को समाहित किया गया है, इतने कानूनों को समाहित करने की जरूरत क्यों पड़ी ? कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने इसे विचारार्थ संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की । इस पर केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि 2002 में इस पर श्रम संबंधी समिति ने विचार किया था और कहा था कि श्रम संबंधी 44 कानूनों को कम किया जाए ।
लेकिन 2004 के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । 2014 में हमारी सरकार आने के बाद इस दिशा में पहल हुई और अब हम इसे ले कर आये हैं । उन्होंने कहा कि इस बारे में श्रम संगठनों, राज्यों, उद्योगपतियों से चर्चा की गई है । यह वास्तव में मजदूरों के हित में है । सदन में विधेयक को पेश किया गया । इसके बाद गंगवार जैसे ही उत्तरजीविका जन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2019 संबंधी विधेयक पेश करने के लिये उठे, वैसे ही विपक्षी सदस्यों ने इसे पेश करने का विरोध किया और इसे तत्काल संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की । इस पर श्रम मंत्री ने कहा कि इसे पहले पेश होने दें, संसद सर्वोच्च है, इसके बाद जो सदन का विचार होगा, वैसा ही होगा । आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह नया विधेयक है, और स्थायी समिति को नहीं गया है, इसके कई प्रावधानों को नहीं देखा गया है ।

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