कर्नाटक: धारा 356 पर मोदी सरकार को 2 बार मिली नाकामी, क्या तीसरी बार होगी कोशिश?
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कर्नाटक: धारा 356 पर मोदी सरकार को 2 बार मिली नाकामी, क्या तीसरी बार होगी कोशिश?

By Aajtak calender  20-Jul-2019

कर्नाटक: धारा 356 पर मोदी सरकार को 2 बार मिली नाकामी, क्या तीसरी बार होगी कोशिश?

कर्नाटक का सियासी नाटक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में कर्नाटक के रूप में पहली बार किसी राज्य सरकार के खिलाफ धारा 356 इस्तेमाल किए जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि मोदी सरकार के लिए धारा 356 के इस्तेमाल का अनुभव सकारात्मक नहीं रहा है. कर्नाटक सरकार के भविष्य पर फैसला करने से पहले मोदी सरकार अपने पिछले अनुभव पर भी विचार करेगी.
'दूध का जला छांछ भी फूंक-फूंककर पीता है', मोदी सरकार 2.0 को पिछले कार्यकाल का अनुभव यही सीख देता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में केंद्र सरकार ने 2014 से 2019 के बीच 2 बार धारा 356 का इस्तेमाल कर राज्य सरकार को बर्खास्त करने की कोशिश की थी, लेकिन उसे देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने जोर का झटका दिया और उसकी काफी किरकिरी हुई थी. अब विधानसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी है. अब फ्लोर टेस्ट पर वोटिंग सोमवार को ही संभव है.
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बर्खास्तगी की पहली कोशिश नाकाम
मोदी राज में चुनी हुई राज्य सरकार को धारा 356 के तहत बर्खास्त करने की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश से हुई. घटनाक्रम की शुरुआत राज्य सरकार के अंदर मची उथल-पुथल से हुई. दिसंबर 2014 में जब मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री कालिखो पुल को मंत्रिमंडल से हटा दिया. इसके बाद से वहां की राजनीतिक गरमा गई. राज्य में सत्तारुढ़ कांग्रेस और बीजेपी ने बागी गुटों के साथ मिलकर जमकर जोर आजमाइश की.
बढ़ते विवादों के बीच 16 दिसंबर, 2015 को नबाम तुकी सरकार ने विधानसभा भवन पर ताला जड़ दिया. समय से पहले आयोजित विधानसभा सत्र की बैठक दूसरे भवन में कराई गई. बैठक में 33 विधायकों ने हिस्सा लिया जिसमें विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया को विधानसभा अध्यक्ष के पद से हटाने का प्रस्ताव पारित हुआ और नया अध्यक्ष नियुक्त कर लिया गया.
जवाब में 17 दिसंबर, 2015 को सामुदायिक सभा उपलब्ध नहीं होने के कारण बागी विधायकों ने होटल में ही विधानसभा सत्र बुला लिया और मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ मतदान किया. फिर कालिखो पुल को मुख्यमंत्री बनाया गया. जनवरी 2016 को मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जिसने केस को संविधान पीठ को सौंप दिया.
इस बीच, 26 जनवरी को मोदी मंत्रिमंडल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में केंद्र द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश के संबंध में राज्यपाल की रिपोर्ट मांगी. 11 फरवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल विधानसभा स्पीकर की शक्तियां नहीं छीन सकता. फिर कोर्ट ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण की याचिका खारिज कर दी. 19 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया. कालिखो पुल फिर से मुख्यमंत्री बन गए.
13 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक बताया और राज्य की कांग्रेस सरकार की बहाली का आदेश दे दिया.
उत्तराखंड में भी हुई किरकिरी
इस बीच, मार्च 2016 में उत्तराखंड में हरीश रावत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार उस समय अल्पमत में आ गई जब विजय बहुगुणा के नेतृत्‍व में कांग्रेस के 9 विधायक बागी हो गए और बागी गुट भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ मिल गया. मुख्‍यमंत्री हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च तक का वक्‍त दिया गया, लेकिन इससे पहले ही गर्वनर की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्वीकार कर लिया.
फैसले के खिलाफ राज्य सरकार उत्तराखंड हाईकोर्ट चली गई जहां कोर्ट ने केंद्र के फैसले को गलत ठहराया. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची और वहां भी मोदी सरकार के फैसले को गलत करार दिया गया. सरकार के बहुमत के लिए विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराया गया और मई में हरीश रावत सरकार बच गई. पूरी प्रक्रिया में केंद्र की खासी किरकिरी हुई थी.
इसी तरह निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने वाले फैसले को 13 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. इस प्रकार देखें तो बीजेपी ने दो बार दो राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया, मगर दोनों बार कोर्ट ने खारिज कर दिया जिसे बीजेपी के लिए झटका माना गया.
कर्नाटक में जिस तरह की राजनीतिक हलचल मची है. उससे ऐसा लगता है कि एचडी कुमारस्वामी सरकार ज्यादा समय तक बनी नहीं रह पाएगी. विधानसभा में राज्यपाल ने सरकार से फ्लोर टेस्ट पास करने को कहा है, लेकिन राज्य सरकार इसे लगातार टाल रही है. आज शुक्रवार को राज्यपाल वजुभाई वाला की ओर पहले डेढ़ बजे फिर शाम 6 बजे तक फ्लोर टेस्ट पास करने का निर्देश दिया, लेकिन राज्य की जेडीएस-कांग्रेस सरकार ने ऐसा नहीं किया. अब देखना है कि राज्यपाल वजुभाई वाला अगला फैसला किस तरह का लेते हैं. एचडी कुमारस्वामी सरकार फ्लोर टेस्ट में फेल होती है या फिर राज्यपाल उसे बर्खास्त करते हैं.

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