अभी आउट नहीं हुए हैं नवजोत सिंह सिद्धू, उनके पास हैं ये ऑप्शंस!
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अभी आउट नहीं हुए हैं नवजोत सिंह सिद्धू, उनके पास हैं ये ऑप्शंस!

By News 18 Hindi calender  17-Jul-2019

अभी आउट नहीं हुए हैं नवजोत सिंह सिद्धू, उनके पास हैं ये ऑप्शंस!

लोकसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व की करारी हार और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह का जलवा, ये नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ जा बैठा है. जैसा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि वो 10 जून को इस्तीफा दे चुके हैं, ऐसे में अगर वो अपनी बात मनवाने की कोशिश भी कर रहे होंगे तो खाली हाथ लौटे हैं. एक महीने के बाद अपने इस्तीफे की बात जगज़ाहिर करने को और भला पढ़ा भी कैसे जा सकता है.

लेकिन ऐसा नहीं कि सिद्धू मैदान से बाहर हो चुके हैं. पंजाब के कैबिनेट मंत्री पद से उनके इस्तीफे को फिलहाल उनके बैकफुट पर होने के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन वो अभी आउट नहीं हुए हैं. वो कांग्रेस में रहते हैं या नहीं, ये बड़ी दूर की बात है, लेकिन पंजाब के सियासी दलों ने अभी से उन पर डोरे डालना शुरू कर दिया है.

सिद्धू के पास ऑप्शन्स की कमी नहीं
आम आदमी पार्टी कह रही है कि 'हमारे खेमे में आ जाओ,' सुखपाल सिंह खैरा की पंजाब एकता पार्टी उन्हें अपना बनाना चाहती है और सिमरजीत सिंह बैंस की लोक इंसाफ पार्टी तो उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए बतौर मुख्यमंत्री कैंडिडेट प्रोजेक्ट करने को तैयार है. इस लिहाज़ से देखा जाए तो नवजोत सिंह सिद्धू के पास ऑप्शन्स की कमी नहीं है. सवाल बस यही है कि क्या वो कुछ ऐसा कदम उठाएंगे कि उन्हें इन ऑप्शन्स पर विचार करना पड़े?

इतनी देर तक चुप्पी क्यों साधे बैठे रहे?
रविवार को सिद्धू ने अपने ट्विटर अकाउंट के ज़रिए खुलासा किया कि वो राहुल गांधी को अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं. इसके बाद सोमवार को उन्होंने फिर ट्वीट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री पंजाब को अपना इस्तीफा दे दिया है. सवाल उठने लाज़िमी थे. विरोधियों ने सवाल पूछा कि जब उन्होंने 10 जून को ही इस्तीफा दे दिया था तो फिर इतनी देर तक चुप्पी क्यों साधे बैठे रहे? उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि वो कैप्टन अमरिंदर सिंह को ब्लैक मेल करने की कोशिश कर रहे थे. विरोधी खेमा सिद्धू को अब ‘ड्रामेबाज़’ (तरुण चुघ ने कहा), ‘रिजेक्टेड माल’ (अनिल विज ने कहा) जैसे नामों से नवाज़ रहा है.

उधर पंजाब कांग्रेस में उनके विरोधी भी कुछ इसी लहज़े में सिद्धू पर हमला बोल रहे हैं. वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा भी उन्हें ड्रामेबाज़ कह रहे हैं. मोहिंद्रा कैप्टन अमरिंदर सिंह के सिपहसालार हैं और सिद्धू के स्थानीय निकाय विभाग का ज़िम्मा बदलकर उन्हीं को दिया गया था.

कांग्रेस के अंदर सिद्धू के विरोधियों में यकायक इज़ाफा
कांग्रेस के अंदर नवजोत सिंह सिद्धू के विरोधियों में यकायक इज़ाफा हो गया, ऐसा लगता है. ब्रह्म मोहिंद्रा, चरणजीत सिंह चन्नी जैसे पार्टी के कई नेता उनके खिलाफ बोल रहे हैं. अमृतसर में उनके रुतबे को भी चोट पहुंची है. या यूं कहें कि पहुंचाई गई है. हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जिन चार लोगों को अलग-अलग इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनाया था, उनमें दिनेश बस्सी भी शामिल थे.

दिनेश बस्सी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खेमे से ताल्लुक रखने वाले कैबिनेट मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया के करीबी हैं. बस्सी अमृतसर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और साल 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान वो अमृतसर (पूर्वी) से टिकट के दावेदार थे. लेकिन चूंकि नवजोत सिंह सिद्धू उस वक्त नए-नए कांग्रेस में शामिल हुए थे तो पार्टी आलाकमान ने उन्हें इस सीट पर उतारा. खबरें ये भी हैं कि सिद्धू ने बस्सी को अमृतसर निगम चुनाव लड़ने से भी रोका था. बस्सी को जब अमृतसर में बधाई देने के लिए होर्डिंग्स लगाई गई तो सिद्धू की तस्वीरें उनसे नदारद थीं.

पंजाब कांग्रेस में फिलहाल कैप्टन का पलड़ा भारी
ऐसे में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बस्सी को अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया है तो ज़ाहिर है कि इसमें सिद्धू के लिए एक संदेश है. फिर सवाल उठता है कि सिद्धू का अगला दांव अब क्या होगा. क्या वो राजनीति में बने रहेंगे. और अगर बने रहेंगे तो क्या वो कांग्रेस में ही बने रहेंगे. ये सवाल इसलिए क्योंकि पंजाब कांग्रेस में फिलहाल कैप्टन अमरिंदर सिंह का पलड़ा भारी है. आलाकमान की बातों को वो पहले भी नज़रअंदाज़ करते आए हैं और आगे भी शायद गुरेज़ ना करें.

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