अरविंद केजरीवाल का सॉफ्ट अवतार, क्या केंद्र सरकार के पास अटके बिल होंगे पास?
Latest News
bookmarkBOOKMARK

अरविंद केजरीवाल का सॉफ्ट अवतार, क्या केंद्र सरकार के पास अटके बिल होंगे पास?

By Aaj Tak calender  11-Jul-2019

अरविंद केजरीवाल का सॉफ्ट अवतार, क्या केंद्र सरकार के पास अटके बिल होंगे पास?

एक तरफ जहां दिल्ली की केजरीवाल सरकार आगामी चुनाव की तैयारियों में जुट गयी है तो वहीं दिल्ली विधानसभा से पास हुए कई अहम विधेयक (बिल) केंद्र सरकार के पास अब तक अटके हुए हैं. दरअसल, विधानसभा से पास किए गए बिल केंद्र सरकार के पास अटके हुए हैं. केंद्र सरकार के जरिए न तो इन बिलों को सहमति दी जा रही है और न ही खारिज किया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि कार्यकाल खत्म होने से पहले केंद्र सरकार के पास फंसे बिलों की मंजूरी लेने के लिए दिल्ली सरकार क्या कदम उठाएगी?
फरवरी 2015 में 70 में से 67 सीटों के साथ आई आम आदमी पार्टी सरकार झगड़ों में ऐसी उलझी की पिछले साढ़े 4 साल में विधानसभा से पास होने वाला हर बिल केंद्र सरकार की हरी झंडी का इंतजार कर रहा है.
पूरे मामले में 'आजतक' ने आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक और दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री गोपाल राय से सवाल किया कि दिल्ली विधानसभा के जरिए पास किए गए कई अहम बिल केंद्र सरकार में अटके हुए हैं, दिल्ली सरकार क्या कदम उठा रही है? इनका जवाब देते हुए गोपाल राय ने कहा कि 'कई बिल को 3 से 4 साल हो गए हैं, हमारे पास एक अधिकार है उन्हें फॉलो करने का और इन बिलों को लेकर कई बार चिट्ठी भी लिखी गई है. फिलहाल जो पेंडिंग बिल हैं उन पर सरकार संज्ञान ले रही है.'
'आजतक' के पास उन तमाम बिलों की लिस्ट मौजूद है. कुछ अहम विधेयक (बिल) जो दिल्ली विधानसभा ने पास किए वो इस प्रकार हैं-
1. जनलोकपाल बिल- 4 दिसंबर 2015 को सदन में पेश करने के बाद 4 दिसंबर 2015 में विधानसभा से जनलोकपाल बिल पास हुआ, लेकिन कई साल गुजर जाने के बाद भी इसे केंद्र से अनुमति नहीं मिल पाई है. इस बिल में जनलोकपाल की नियुक्ति से लेकर, चयन समिति, जांच समिति, जनलोकपाल के अधिकार क्षेत्र और जनलोकपाल को हटाने की प्रक्रिया तक सरकार को काफी आलोचना झेलनी पड़ी.
2. विधायक सैलरी बिल- 30 दिसंबर 2015 को सभी विधायकों, मंत्री, मुख्यमंत्री, स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की सैलरी बढ़ाने का अमेंडमेंट बिल पास किया गया. लेकिन अब तक के सबसे विवादित इस बिल को केंद्र सरकार ने पास नहीं किया है. इसमें विधायकों की सैलरी 88 हजार से बढ़ाकर 2 लाख 10 हजार करने का प्रावधान किया गया. साथ ही सालाना ट्रैवल अलाउंस 50 हजार से बढ़ाकर 3 लाख रुपए.
3. शिक्षा से जुड़े बिल- प्राइवेट स्कूलों के अकाउंट चेक करने और बढ़ी हुई फीस को अभिभावक को वापस लौटाने जैसे अमेंडमेंट बिल को विधानसभा ने 30 जून 2015 को पास किया. लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी ये केंद्र से पास नहीं हो पाया है.
4. दिल्ली स्कूल बिल- इस बिल को 1 दिसंबर 2015 को सदन ने पास तो कर दिया लेकिन कई मुख्य बदलाव वाले इस बिल पर ग्रहण बरकरार है. इस बिल में नर्सरी एडमिशन की प्रक्रिया बेहतर बनाने से लेकर, डोनेशन लेने वाले स्कूल पर कार्रवाई जैसे बदलाव किए गए थे.
5. सिटीजन बिल- 26 नवंबर 2015 को पास हुआ ये बिल भी केंद्र सरकार के पास अटका पड़ा है. इस बिल में बदलाव किया गया ताकि जनता को एक टाइम लिमिट दी जाए और उन्हें सरकारी काम पूरा करने के लिए अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़ें. अगर ऐसा होता है तो अधिकारियों की सैलरी काटने का प्रावधान भी इस बिल में जोड़ा गया. अगस्त 2017 में इस बिल में बदलाव कर दोबारा विधानसभा में पास किया गया.
6. सीआरपीसी अमेंडमेंट बिल- मंत्री सत्येंद्र जैन के दिल्ली गृह मंत्रालय से जुड़े इस बिल में अब तक क्रिमिनल केस पर जांच का अधिकार सिर्फ SDM तक सीमित था, जिसमें बच्चों या महिलाओं की आत्महत्या की रिपोर्ट पेश करनी होती है लेकिन इस बदलाव के बाद सरकार किसी भी क्रिमिनल केस की अपने स्तर पर जांच कर सकती है.
7. गेस्ट टीचर्स को रेगुलर करने का बिल- 4 अक्टूबर 2017 को एक विशेष सत्र में दिल्ली विधानसभा ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ा रहे 15 हजार गेस्ट टीचर्स को पक्का करने सम्बंधित बिल को पास किया था. जनवरी 2018 में एलजी ने बिल खारिज कर दिया जिसके बाद दिल्ली सरकार ने हाइकोर्ट का रुख किया था.
इस बीच 'आप' नेता और मंत्री गोपाल राय से जब 'आजतक' ने पूछा कि चुनाव नजदीक है, ऐसे में केजरीवाल सरकार गृह मंत्रालय से इन बिलों को जल्द से जल्द पास कराने की क्या कोशिश कर रही है? गोपाल राय ने जवाब देते हुए कहा कि 'हम सभी बिंदुओं पर चर्चा चाहते हैं. हमारी सरकार अपने दायित्व से ज्यादा काम करना चाहती है. इसलिए बिलों के मामले में सरकार ने कानूनी दायरे के अलावा प्रशासनिक तौर पर कोशिश की. फिलहाल सरकार तेजी से फॉलो करने की तरफ आगे बढ़ रही है.
बता दें कि आम आदमी पार्टी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही केंद्र सरकार और उपराज्यपाल के साथ टकराव की स्थिति बनी रही. हालांकि इन दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र की मोदी सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

MOLITICS SURVEY

ट्रैफिक रूल्स में हुए नए बदलाव जनता के लिए !

फायदेमंद
  33.33%
नुकसानदायक
  66.67%

TOTAL RESPONSES : 24

Raise Your Voice
Raise Your Voice 

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know