सदन की मर्यादा बनाए रखना सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी :लोकसभा अध्यक्ष
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सदन की मर्यादा बनाए रखना सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी :लोकसभा अध्यक्ष

By Khaskhabar calender  07-Jul-2019

सदन की मर्यादा बनाए रखना सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी :लोकसभा अध्यक्ष

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन की मर्यादा और अनुशासन को बनाये रखना लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनता ऎसे जनप्रतिनिधियों को पसंद करती है जो लोकसभा या विधानसभा में अपने क्षेत्र की समस्याओं को मर्यादा और अच्छे संवाद के साथ सदन में प्रस्तुत करते हैं। राजस्थान विधानसभा के सदस्यों ने अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर पर कई पदों पर पहुंच कर इस विधानसभा का गौरव बढ़ाया है और प्रदेश के मान सम्मान में वृद्धि की है।

बिरला रविवार को राजस्थान विधानसभा में पंद्रहवीं विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि पद से सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा की पाठशाला से उन्हें जो स्वस्थ संसदीय परम्पराओं की सीख मिली है उन नियम एवं परम्पराओं को लोकसभा में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही जितनी अधिक चलेगी, सरकार उतनी ही अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी। वहीं जिस मंत्री को जितने अधिक प्रश्नों का उत्तर देने का अवसर मिलेगा, वह मंत्री अपने विभाग को उतना ही बेहतर तरीके से समझ पाएगा।

बिरला ने कहा कि किसी भी विधानसभा या लोकसभा में सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारधाराओं से चुनकर आते हैं। उन्हें सदन में उस विचारधारा पर बोलने का अधिकार है परन्तु अंततः सदन में दलीय विचारधारा से ऊपर उठकर राज्यहित और राष्ट्रहित में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बजट पर गहनता से चर्चा होती है उसी प्रकार सदन में रखे जाने वाले बिलों पर समितियों में भी विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा सदन कभी भी पक्ष या प्रतिपक्ष का नहीं होता यह सभी सदस्यों का सदन है, इसलिए सदन की मर्यादा और अनुशासन को कायम रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी होती है। वहीं सदन का पीठासीन अधिकारी होने के नाते अध्यक्ष की यह जिम्मेदारी है कि वह पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों का संरक्षण करे और उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सदन में उठाने का अवसर दे। उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा के सदस्यों को सदन की कार्यवाही में अधिक से अधिक हिस्सा लेना चाहिए ताकि उन्हें प्रदेश और देश की समस्याओं एवं अभावों का पता चल सके। उन्होंने कहा कि ज्ञान निरंतर सीखने की प्रक्रिया है इसलिए जब भी अवसर मिले, सीखने के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रबोधन कार्यक्रम से विधानसभा के सदस्यों और पूर्व सदस्यों को विधायी प्रक्रियाओं, नियमों और संसदीय कार्यप्रणाली को सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा।

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