अनिल कुंबले की बॉलिंग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगाए जमकर शॉट
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अनिल कुंबले की बॉलिंग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगाए जमकर शॉट

By Bhaskar calender  26-Jun-2019

अनिल कुंबले की बॉलिंग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगाए जमकर शॉट

जिले के पाटन में मर्रा स्थित स्कूल का नजारा बुधवार को बदला-बदला था। स्कूल के मैदान की पिच पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर अनिल कुंबले बॉलिंग कर रहे थे और बैटिंग पर थे प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अनिल कुंबले की बॉलिंग पर जमकर शॉट लगाए। कुछ शॉट काफी शानदार रहे, जिसकी लोगों ने भी खूब तारीफ की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल के बच्चों के साथ भी खेला और वहीं परिसर में ताइक्वांडो के खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। वे स्कूल में ही बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन भी करेंगे। 
  1. दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मर्रा स्थित स्कूल से प्रदेश में शाला प्रवेशोत्सव की शुरुआत करने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर इसका शुभारंभ किया। इस दौरान क्रिकेटर अनिल कुंबले भी मुख्यमंत्री के साथ पहुंचे स्कूल में पहुंचे थे। इस दौरान शासकीय स्कूल परिसर में नेट प्रैक्टिस के लिए बने पिच पर मुख्यमंत्री बघेल ने बैटिंग की। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ अनिल कुंबले ने भी मंच भी साझा किया। खेल को बढ़ावा देने दोनों ने कार्यक्रम से पहले बच्चों के साथ स्कूल मैदान में क्रिकेट भी खेला।
  2. मर्रा गांव पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और मुख्यमंत्री का क्षेत्र है। मुख्यमंत्री बघेल ने इसी स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की थी। यहां मुख्यमंत्री अपने सहपाठियों से घुलमिल गए। उनसे बातचीत कर न केवल बीते दिनों की पुरानी याद ताजा की बल्कि उनके साथ फोटो भी खिचवाई। मुख्यमंत्री स्कूल में बच्चों को पुस्तक और यूनिफार्म वितरण करेंगे। साथ ही स्कूल में एक कंप्यूटर लैब, आईसीटी कक्ष का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की। 
     
  3. चार साल इसी स्कूल से पढ़ाई की है मुख्यमंत्री भूपेश ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 1967 से 1971 तक प्राइमरी की पढ़ाई अपने गृह ग्राम बेलौदी में की थी। इसके बाद उन्होंने छठवीं से मैट्रिक तक की पढ़ाई के लिए मर्रा स्कूल में प्रवेश लिया। भूपेश बघेल सुबह-सुबह चार किमी तक कभी साइकिल से आते और कभी बरसात की वजह से पैदल आते क्योंकि पगडंडी रास्ता था और काफी खराब हो जाता था। फिर बेलौदी लौटते और फिर साढ़े दस बजे स्कूल के समय में पहुंच जाते। इस प्रकार सोलह किमी रोज उन्हें साइकिल से या पैदल तय करना होता था।

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