बसपा के लिए आसान नहीं अकेले उपचुनाव की परीक्षा, गठबंधन टूटने से वोटों का बिखराव तय
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बसपा के लिए आसान नहीं अकेले उपचुनाव की परीक्षा, गठबंधन टूटने से वोटों का बिखराव तय

By Jagran calender  26-Jun-2019

बसपा के लिए आसान नहीं अकेले उपचुनाव की परीक्षा, गठबंधन टूटने से वोटों का बिखराव तय

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन में बहुजन समाज पार्टी ने भले ही दस संसदीय क्षेत्रों पर नीला झंडा फहरा लिया हो, लेकिन विधानसभा की 12 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में अकेले लड़ने की राह उसके लिए कांटों भरी नजर आ रही है। लगातार घटते जनाधार को रोक पाना और सपा को धकेल प्रदेश की राजनीति में दूसरा पायदान पाने की हसरत पूरी होना भी पार्टी के लिए आसान नहीं है।
बसपा पहली बार उपचुनाव की परीक्षा में उतर रही है। जिन 12 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैैं उनमें से केवल एक सीट अंबेडकरनगर जिले की जलालपुर ही उसके पास रही है। अन्य 11 सीटों में से सपा के पास एक और भाजपा 10 पर काबिज रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो बसपा तीन क्षेत्रों में ही दूसरे स्थान पर रही, जबकि सपा भी तीन स्थानों पर मुख्य मुकाबले में थी। कांग्रेस ने भी गंगोह क्षेत्र में दूसरा स्थान पाया। ऐसे में उक्त सीटों पर बसपा को विशेष राहत मिल पाने की उम्मीद अधिक नहीं।

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