गुस्साती, तिलमिलाती, बौखलाती ममता, क्या ज़मीन खिसक रही है?
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गुस्साती, तिलमिलाती, बौखलाती ममता, क्या ज़मीन खिसक रही है?

By Satyahindi calender  16-Jun-2019

गुस्साती, तिलमिलाती, बौखलाती ममता, क्या ज़मीन खिसक रही है?

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल के कई दिन बीत जाने और अस्पतालों में इलाज न होने से मरने वाले मरीजों की तादाद बढ़ने के बाद ममता बनर्जी का गुस्सा सातवें आसमान पर है। वह गुस्साती हैं, तिलमिलाती हैं, शांत होती हैं, डॉक्टरों से अपील करती हैं और फिर गुस्सा हो जाती हैं। क्या यह ममता बनर्जी का नया रूप है या यही उनकी कार्यशैली है, यह सवाल पूछा जाने लगा है।
माँगें स्वीकार, फिर भी हड़ताल!
शनिवार को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि डॉक्टरों की सारी माँगें राज्य सरकार ने स्वीकार कर ली हैं। उन्होंने दावा किया कि एनआरएस अस्पताल के डॉक्टरों पर हमला करने के कुछ घंटों के अंदर ही 5 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया। उन्हें अदालत से ज़मानत तक नहीं मिली है। ममता बनर्जी का यह भी कहना है कि वह किसी से बात करने को तैयार हैं, वह अपने दफ़्तर में 5 घंटे तक प्रतिनिधिमंडल का इंतजार करती रहीं, पर कोई नहीं आया। उन्होंने कहा कि इससे यह साफ़ है कि बाहर के लोग इस हड़ताल के पीछे हैं, जो नही चाहते कि किसी तरह इस समस्या का समाधान निकले।
लेकिन हड़ताल की वजह से हालत इतनी बुरी हो चुकी है कि बंगाल की दीदी के बिल्कुल नज़दीक के लोग भी अब उनकी आलोचना करने लगे हैं। इसके साथ ही सवाल यह उठता है कि क्या ममता बनर्जी के हाथ से पश्चिम बंगाल निकलता जा रहा है? क्या वह पार्टी और प्रशासन पर से नियंत्रण खोती जा रही हैं? लोकसभा चुनावों में पार्टी की क़रारी हार और बीजेपी की अप्रत्याशित जीत ने राज्य की सियासी तसवीर बदल दी है। ममता बनर्जी या तो इसे ठीक से समझ नहीं पा रही हैं या वह बीजेपी को संभाल नहीं पा रही हैं। 
तेज़ खोती ममता
लेकिन वही ममता अब अपना तेज़ खोती जा रही हैं। पार्टी पर उनकी पकड़ ढीली होती जा रही है। इससे इससे समझा जा सकता है कि उनके एकदम नज़दीक रहे और पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले मुकुल राय ने उनका साथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया। उन पर सारदा चिटफंड घोटाले में शामिल होने का आरोप था। समझा जाता है कि उससे बचने के लिए ही उन्होंने पाला बदला। पर यह भी कहा जाता है कि सारदा घोटाले में तो दूसरे कई नेताओं की सीबीआई जाँच हो रही है, उन्होंने तो पाला नहीं बदला। अब ममता के ख़िलाफ़ बीजेपी की पूरी रणनीति बनाने का काम मुकुल राय ही कर रहे हैं।
इसी तरह दो मौकों पर ममता बनर्जी ने अपना आपा खोया और बीजेपी के जाल में फँस गईं। चुनाव प्रचार के दौरान उनके बगल से गुजरते हुए बीजेपी समर्थकों ने उन्हें देखते ही ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया। जाहिर है, यह चिढ़ाने के लिए ही किया गया था। ममता चिढ़ गईं, वह गाड़ी से उतरीं और जाकर उन लड़कों को डाँट लगाई। बीजेपी ने इसे मुद्दा बना लिया और प्रचारित कर दिया कि बंगाल में ‘जय श्री राम’ कहने पर पुलिस गिरफ़्तार कर लेती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इसे खूब भुनाया और ललकारा कि उन्हें भी गिरफ़्तार किया जाए। तृणमूल को चुनाव में इससे नुक़सान हुआ।

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