राजस्‍थान लोकसभा चुनाव 2019 में इस वजह से भाजपा मार सकती है बाजी !!
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राजस्‍थान लोकसभा चुनाव 2019 में इस वजह से भाजपा मार सकती है बाजी !!

By Jagran calender  20-May-2019

राजस्‍थान लोकसभा चुनाव 2019 में इस वजह से भाजपा मार सकती है बाजी !!

राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक पार्टियों और प्रत्याशियों को 23 को आने वाले नतीजों का इंतजार है। कांग्रेस की काफी कोशिश के बावजूद ना तो प्रदेश में बेरोजगारी चुनावी मुद्दा बन पाया और ना ही राफेल पर आम मतदाताओं ने चर्चा की। चुनाव में सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवाद मुद्दा रहे।
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प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार द्वारा की गई किसान कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते की चर्चा भी चुनाव में कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन सकी। चुनाव के दौरान सबसे रोचक बात राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल का राजग में शामिल होना और उसी दिन भाजपा द्वारा उनके लिए नागौर सीट छोड़ना रही। बेनीवाल की जाट वोट बैंक पर पकड़ को देखते हुए भाजपा ने अपने केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी का टिकट काटकर उनका समर्थन किया। बेनीवाल का मुकाबला कांग्रेस की ज्योति मिर्धा से रहा।
जोधपुर लोकसभा सीट पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। उन्होंने यहां से अपने बेटे वैभव को उतारा तो भाजपा ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रत्याशी बनाया। दोनों के बीच कड़ा मुकाबला दिखा। इस सीट को महत्वपूर्ण इसी लिहाज से माना जा सकता है कि गहलोत चुनाव अभियान के बीच आठ दिन तक यहां रहे, वहीं शेखावत के लिए पीएम मोदी ने सभा की और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने रोड शो किया।
 
पूर्व सीएम और भाजपा उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह के मुकाबले कांग्रेस ने टिकट मिलने से एक दिन पहले भाजपा छोड़कर पार्टी में शामिल होने वाले आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता प्रमोद शर्मा को टिकट दिया। क्षेत्र के अधिकांश कांग्रेसी उनके चुनाव अभियान से दूर रहे। स्वाभिमान के नाम पर भाजपा से अलग होने वाले भाजपा के दिग्गज नेता रहे जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह का मुकाबला भाजपा के कैलाश चौधरी से रहा।
बीकानेर में दो मौसेरे भाइयों का आमने-सामने चुनाव लड़ना चर्चा का विषय रहा। भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कांग्रेस उम्मीदवार मदन मेघवाल में मुकाबला हुआ। भरतपुर और अलवर सीटों पर प्रत्याशी उतारकर बसपा ने दोनों ही बड़ी पार्टियों के समीकरण बिगाड़ने की कोशिश की।

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